भारतीय नहीं विदेशी है आपकी फेवरेट 'इडली', राजाओं के साथ आई हिन्दुस्तान, दिलचस्प है इतिहास
इडली-सांभर-नारियल की चटनी आप भी बड़े चाव से खाते होंगे लेकिन क्या आपको पता है ये भारतीय मूल की डिश नहीं है। बल्कि कही और से भारत आई है। चलिए आज आपको इडली का पूरा इतिहास और इसे कैसे बनाया जाता था, डिटेल में बताते हैं।

इडली-सांभर-चटनी आप भी उंगलियां चाट-चाटकर खूब खाते होंगे और हम सभी लोगों को लगता है कि इडली साउथ इंडियन डिश है। साउथ साइड ही इडली ज्यादा खाई जाती है और वहां की इडली का टेस्ट ही अलग होता है लेकिन क्या आप जानते हैं इडली विदेशी डिश है। जी हां, इडली साउथ इंडियन नहीं है बल्कि विदेश से भारत तक का सफर तय करके आई है। इडली को आज कई अलग तरह से पहचान मिली हुई है और लोग इसे कई तरह से बनाकर खाते हैं, आपको रवा इडली, कांचीपुरम इडली, टट्टे इडली, मल्लिगे इडली, मसाला इडली वगैरह का स्वाद मिल सकता है। ये पुराने जमाने के राजाओं के साथ हिंदुस्तान आ गई थी और तभी से यहां की फेवरेट डिश बन गई। भारतीय लोगों ने इडली के साथ सांभर, चटनी को भी जोड़ दिया। चलिए आपको बताते हैं आखिर इडली कहां से आई और कैसे? साथ ही इडली सबसे पहले किसने बनाई थी।
कहां से आई इडली?
आपकी पसंदीदा डिश इडली इंडोनेशिया से भारत सालों पहले आ गई थी। 7वीं से 12वीं के दौरान, इंडोनेशिया में 'केडली' या 'केदारी' नाम की डिश खाई जाती थी, जो आज की इडली जैसी थी। इसे बनाने के लिए चावल और फर्मेंटेशन वाले प्रॉसेस का इस्तेमाल किया जाता था। इस प्रॉसेस के साथ वहां के कुक सॉफ्ट राइस केक बना देते थे, जो इडली जैसा होता था। उसी समय इंडोनेशिया पर शैलेंद्र और संजय जैसे कई हिंदू राजाओं का राज भी था। ऐसे में छुट्टियों के समय या फिर दुल्हन खोजने के लिए ये राजा जब भी भारत आते थे, अपने साथ शादी हलवाई को लेकर आते थे। वही हलवाई यहां केडली भी बनाते थे, जिसे अरबी और भारतीय लोगों ने सीखा।
अरब से भी जुड़ा इतिहास
इडली सिर्फ इंडोनेशिया से नहीं बल्कि अरब की उत्पत्ति भी मानी जाती है। 'एनसाइक्लोपीडिया ऑफ फूड हिस्ट्री' नामक पुस्तक और 'सीड टू सिविलाइजेशन-द स्टोरी ऑफ फूड' में लिखा है कि भारत में बसे अरबी लोग सिर्फ हलाल मीट खाते थे और इसके साथ वह चावल के गोले जैसी डिश बनाकर खाते थे। अरबी लोग चावल के इस गोले को नारियल की चटनी के साथ खाते थे। इस ट्रिक को भारतीय रसोइयों ने भी सीखा और चावल के साथ उड़द दाल का देसी फ्लेवर जोड़ दिया। ऐसे में खमीर जल्दी बना और इडली का स्वाद और बढ़ गया। इस तरह से केडली की इंडोनेशियाई रेसिपी भारत आई और इडली बनकर मशहूर हो गई।
साउथ में क्यों हुई फेमस
इडली को पहले दाल से बनाया जाता था और फिर चावल की अधिक पैदावार होने के बाद इसे चावल से बनाया जाने लगा। फिर इसे कपड़े में रखकर भाप से पकाया जाने लगा और स्पंजी-सॉफ्ट गोल आकार दिया गया। साउथ में गर्मी खूब पड़ती है और वहां चावल-उड़द दाल की पैदावार ज्यादा होती है। ऐसे में शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए वहां लोग चावल खाते हैं। चावल-उड़द से बनी इडली उनका पसंदीदा खाना बन गया। इस तरह से साउथ में इडली ज्यादा मशहूर है और इसे वहां का फूड माना जाने लगा।
स्टीम करना सीखा
भारत में ज्यादातर व्यंजन तलकर या भूनकर ही पकाए जाते थे लेकिन फिर यहां के रसोइयों ने इडली को भाप में पकते देखा। फिर उन्हें समझ आया कि भाप में पका खाना लंबे समय तक खराब नहीं होता और सॉफ्ट भी रहता है। इसलिए इडली को भी भाप में पकाना शुरू कर दिया। आज हम लोगों के पास इडली स्टैंड है लेकिन सबसे पहले इसे पत्थर में बनाया जाता था। एक बड़ा सा पत्थर जमीन पर ही लगा होता था, जिसके बीच में बड़ा गोल छेद कर उसमें पानी भरकर गर्म किया जाता था। इस पानी की भाप से ही पत्थर पर इडली को बनाया जाता था। अगर आपको पुराने जमाने में इडली कैसे बनती थी, देखना है कि साउथ की फिल्म इडली देख लें। साथ ही भारतीय लोगों ने इडली के साथ सांभर बनाना शुरू किया और उसी में डुबोकर उसे खाने लगे। इसके साथ नारियल की चटनी का चलन उन्होंने अरबी लोगों से सीखा था। ऐसे आप तक इडली आई है।
लेखक के बारे में
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