काम की बात: काला या पीला गुड़, कौन सा है बेहतर? बिना केमिकल वाला कैसे चुनें, यहां देखें टिप्स

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मार्केट में दो तरह के गुड़ मिलते हैं, काला गुड़ और पीला गुड़। इन दोनों में से कौन सा सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है और किस में केमिकल्स हैं; इन सभी सवालों का जवाब यहां जान सकते हैं। अच्छा गुड़ कैसे चुनना है, उससे जुड़ी टिप्स भी हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं।

Black vs Yellow Jaggery
काला या पीला गुड़, कौन सा है बेहतर?

गुड़ भारतीय खानपान का एक अहम हिस्सा रहा है। घर में मिठाई जमाने से ले कर चाय बनाने के लिए और खाने के साथ कुछ मीठा खाने के लिए; गुड़ का इस्तेमाल किया जाता रहा है। आमतौर पर लोग चीनी की जगह गुड़ खाना पसंद करते हैं, क्योंकि ये चीनी की तरह रिफाइंड नहीं होता है। खैर, आपने देखा होगा कि मार्केट में आमतौर पर दो तरह के गुड़ मिलते हैं, काला गुड़ और पीला गुड़। बहुत लोग पीला गुड़ खरीदते हैं, क्योंकि उन्हें ये ताजा और शुद्ध लगता है। वहीं कुछ लोग मनाते हैं कि पीले गुड़ में केमिकल होता है इसलिए काला गुड़ ज्यादा फायदेमंद है। अब सवाल है कि इन दोनों में से क्या ज्यादा अच्छा है? आप भी कन्फ्यूज हैं? तो चलिए जानते हैं इनमें से कौन सा चुनें।

काले और पीले गुड़ में सिर्फ रंग का अंतर नहीं होता

आमतौर पर ये कन्फ्यूजन देखने को मिलती है कि काला गुड़ ज्यादा अच्छा है या पीला गुड़। कई लोग मानते हैं कि पीले गुड़ में केमिकल होता है, तो वहीं कुछ लोगों को लगता है कि काला गुड़ पुराना और बेकार होता है। दरअसल काले और पीले गुड़ में सिर्फ रंग का ही फर्क नहीं होता है, बल्कि प्रोसेसिंग यानी बनाने का तरीका भी अलग होता है। प्रोसेसिंग के अलग तरीके की वजह से गुड़ में न्यूट्रिशन और क्वॉलिटी का भी फर्क हो जाता है, इसलिए खरीदते समय इसका रंग देखना काफी कुछ बता देता है।

कैसे बनाया जाता है काला गुड़?

काला गुड़ भी गन्ने के रस से ही बनता है, लेकिन इसे बनाने का तरीका थोड़ा अलग होता है। इसमें गन्ने के रस को काफी देर के लिए पकाया जाता है, जबतक वो गाढ़ा और गहरे रंग का नहीं हो जाता। इसमें किसी तरह का केमिकल इस्तेमाल नहीं होता है, इसलिए इससे बनने वाला गुड़ भी काले रंग का ही होता है।

क्या पीले गुड़ में मिलाया जाता है केमिकल?

पीले गुड़ को बनाने का तरीका थोड़ा सा अलग होता है। दरअसल इसे बनाते समय गन्ने के रस को साफ करने के लिए सोडियम हाइड्रोसल्फाइट जैसे केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इससे गुड़ देखने में काफी चमकदार और साफ लगता है, लेकिन केमिकल प्रोसेसिंग की वजह से इसमें मौजूद कुछ मिनरल नष्ट हो जाते हैं।

पीला या काला गुड़, कौन सा सेहत के लिए बेहतर?

अगर बेहतर की बात करें तो काला गुड़ ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। चूंकि इसमें किसी भी तरह के केमिकल्स का इस्तेमाल नहीं होता है, इसलिए ये ज्यादा पोषक तत्वों से भरपूर होता है। काले गुड़ में आयरन, कैल्शियम जैसे मिनरल्स की मात्रा भी भरपूर पाई जाती है। हालांकि ये भी शुगर का नेचुरल फॉर्म है, इसलिए एक्सपर्ट्स गुड़ का सेवन लिमिट में करने की सलाह देते हैं।

अच्छा गुड़ चुनने के लिए ध्यान रखें ये बातें

बाजार में अच्छा गुड़ चुनने के लिए रंग के अलावा इसकी बनावट पर भी ध्यान दें। अगर गुड़ आराम से हाथ से टूट रहा है, तो उसे ना लें। क्योंकि ये केमिकली ट्रीटेड हो सकता है। इसके अलावा गुड़ को चख कर देखें। अगर इसमें हल्का सा नमकीन टेस्ट आता है, तो ना लें। ये बासी गुड़ हो सकता है क्योंकि रखे-रखे गुड़ के मिनरल्स नमकीन टेस्ट देने लगते हैं।

Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

Anmol Chauhan

अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

विशेषज्ञता के क्षेत्र
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