ठंडे पानी के लिए करते हैं मटके का इस्तेमाल तो भूलकर भी ना करें ये 5 गलतियां, पड़ जाएंगे बीमार

Mar 10, 2026 11:32 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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Mistakes to avoid while using matka : मिट्टी के घड़े के पानी की मिठास का फायदा तभी मिलता है जब इसके रखरखाव में पूरी सावधानी बरती गई हो। थोड़ी सी भी लापरवाही आपकी सेहत को फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती है।

ठंडे पानी के लिए करते हैं मटके का इस्तेमाल तो भूलकर भी ना करें ये 5 गलतियां, पड़ जाएंगे बीमार

गर्मियां शुरू होते ही कई परिवार ठंडे पानी के लिए फ्रिज की जगह मिट्टी के घड़े का ऑप्शन चुनना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि फ्रिज का पानी पीने से कई लोगों को गले में दर्द की शिकायत होने लगती है। ऐसे में मिट्टी के मटके का सोंधा पानी अमृत जैसा महसूस होता है। गर्मियों का यह 'देसी फ्रिज' न केवल पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखता है, बल्कि इसके क्षारीय (alkaline) गुण शरीर के पीएच लेवल को संतुलित रखने में भी जादुई असर दिखाते हैं। हालांकि मिट्टी के घड़े के पानी की मिठास का फायदा तभी मिलता है जब इसके रखरखाव में पूरी सावधानी बरती गई हो। जी हां, थोड़ी सी भी लापरवाही आपकी सेहत को फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती है। आइए जानते हैं मटके का पानी यूज करते समय किन गलतियों को करने से बचना चाहिए।

मटके का पानी यूज करते समय बरतें ये सावधानियां

सफाई का रखें ख्याल: मटके को हर 2-3 दिन में खाली करके सिर्फ साफ पानी से रगड़कर धोएं। साबुन या डिटर्जेंट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, क्योंकि ऐसा करने से मटके के रोमछिद्र केमिकल सोख सकते हैं।

हाथों का संपर्क बचाएं: मटके से पानी निकालने के लिए सीधे हाथ या गिलास न डुबोएं। हमेशा लंबे हैंडल वाले 'डोंगे' या नल वाले मटके ही खरीदें। ऐसा करने से संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है।

स्थान का चुनाव: मटके को कभी भी सीधी धूप में न रखें। धूप से पानी गर्म तो होगा ही, साथ ही मिट्टी के प्राकृतिक गुणों पर भी असर पड़ता है। इसे घर के सबसे ठंडे और छायादार कोने में रखना ही सबसे बेहतर है। इसके अलावा मटके को गीली बोरी या कपड़े से लपेटकर रखने पर वाष्पीकरण (evaporation) बेहतर होता है, जिससे पानी अधिक ठंडा और शुद्ध बना रहता है।

पुराना मटका बदलें: मिट्टी के मटके की भी एक शेल्फ लाइफ होती है। समय के साथ इसके सूक्ष्म छिद्र बंद हो जाते हैं, जिससे पानी ठंडा होना कम हो जाता है। बेहतर स्वास्थ्य और ताजगी के लिए हर साल नया मटका लेना अच्छा उपाय हो सकता है।

ढक्कन की शुद्धता: अक्सर हम मटके की सफाई तो कर देते हैं, लेकिन उसके ढक्कन को नजरअंदाज कर देते हैं। मटके को हमेशा एक ऐसी प्लेट या ढक्कन से ढकें जो पूरी तरह फिट हो, ताकि धूल-मिट्टी या कीड़े पानी के अंदर न जा सकें।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

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दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

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