फोमो नहीं, जोमो है Gen Z का नया फेवरेट! जानें क्या है ये ट्रेंड

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दूसरों को घूमते और मजे करते देखकर अगर आपको लगता है कि कुछ छूट रहा है तो यह फोमो (FOMO) है। लेकिन GenZ अब फोमो की जगह एक नए शब्द की बात कर रहा है- JOMO, आखिर क्या है ये?

JOMO- New Gen Z Slang Meaning
GenZ की नई पसंद है जोमो, क्या है ये नया ट्रेंड?

क्या आपको भी कभी ऐसा लगता है कि बाकी लोग घूम रहे हैं, दोस्तों के साथ मजे कर रहे हैं और आप घर पर बैठे कुछ मिस कर रहे हैं? यही डर फोमो (Fear Of Missing Out) कहलाता है। लेकिन अब GenZ इसी सोच से थोड़ा दूर होता दिख रहा है। इसकी जगह एक नया शब्द तेजी से चर्चा में आ रहा है- जोमो। आखिर क्या है यह जोमो और क्यों GenZ अब इसे ज्यादा पसंद कर रहा है? चलिए जानते हैं -

फोमो क्या होता है?

फोमो का मतलब है कुछ छूट जाने का डर। जैसे दोस्तों की पार्टी में आप नहीं गए और बाद में उनकी तस्वीरें देखीं। इसके बाद मन में आने लगा कि काश मैं भी वहां होता। यही वह बेचैनी है, जिसमें लगता है कि बाकी लोग जिंदगी का मजा ले रहे हैं और हम पीछे रह गए। सोशल मीडिया ने इस फीलिंग को और ज्यादा बढ़ाया है। दूसरों की घूमने-फिरने और पार्टी करने वाली फोटोज देखकर कई बार अपनी जिंदगी कम मजेदार लगने लगती है।

अब जोमो की बात क्यों हो रही है?

जोमो (JOMO- Joy Of Missing Out) का मतलब है कुछ चीजों को मिस करने में भी खुशी महसूस करना। यानी अगर किसी दिन बाहर जाने का मन नहीं है, तो घर पर रहना भी बिल्कुल ठीक है। GenZ के बीच यह सोच बढ़ रही है कि हर जगह जाना और हर चीज में शामिल होना जरूरी नहीं। अगर आपको अकेले बैठकर आराम करने में अच्छा लगता है, तो उसके लिए किसी को सफाई देने की जरूरत नहीं है।

जोमो का मतलब अकेले रहना नहीं!

जोमो का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि दोस्तों से दूरी बना लेना या फिर किसी से मिलना-जुलना ही बंद कर देना। इसका सीधा मतलब है कि अपनी पसंद को भी उतनी ही अहमियत देना जितनी दूसरों की पसंद को देते हैं। दोस्तों के साथ बाहर जाना अच्छा लगता है तो जाएं, लेकिन अगर कभी घर पर रहना ज्यादा अच्छा लगे तो सिर्फ इसलिए बाहर जाने की जरूरत नहीं कि बाकी लोग जा रहे हैं।

घर पर रहना भी हो सकता है मजेदार

जोमो वाली सोच में घर पर रहना बोरिंग नहीं है। अपना पसंदीदा खाना बनाना, आराम करना, किताब पढ़ना, गाने सुनना या कोई पसंदीदा काम करना भी दिन को अच्छा बना सकता है। कई बार पूरा दिन बिना किसी प्लान के सिर्फ अपने लिए बिताना भी काफी सुकून देता है। हर खुशी लोगों के बीच जाकर ही मिले, यह जरूरी नहीं।

सोशल मीडिया से थोड़ा दूर रहना

जोमो का एक हिस्सा सोशल मीडिया से दूरी बनाना भी हो सकता है। लगातार दूसरों की तस्वीरें और वीडियो देखने से मन में यह सवाल आने लगता है कि मेरी जिंदगी में ऐसा क्यों नहीं है। ऐसे में कुछ समय के लिए फोन दूर रखना और अपनी जिंदगी पर ध्यान देना अच्छा लग सकता है। इससे दूसरों से अपनी तुलना करने की आदत भी कम हो सकती है।

हर इनवाइट पर जाना जरूरी नहीं

GenZ की जोमो वाली सोच यह भी कहती है कि हर इनवाइट पर हां कहना जरूरी नहीं। अगर आप थके हुए हैं या बस घर पर आराम करना चाहते हैं, तो मना करना गलत नहीं है। हर वीकेंड बाहर निकलना या हर प्लान का हिस्सा बनना ही मजेदार जिंदगी की निशानी नहीं है।

फोमो से जोमो तक का सफर

फोमो में डर रहता है कि कहीं कुछ छूट ना जाए, जबकि जोमो में यही बात उलट जाती है। यहां कुछ छूट जाने की चिंता नहीं, बल्कि अपने समय और सुकून को चुनने की खुशी है। यानी GenZ के लिए अब सवाल यह नहीं कि 'मैं क्या मिस कर रहा हूं?', बल्कि यह हो सकता है कि 'मैं अपने लिए क्या कर सकता हूं?' यही फोमो से जोमो तक का बदलाव है।

Shubhangi Gupta

लेखक के बारे में

Shubhangi Gupta

परिचय एवं अनुभव

शुभांगी गुप्ता एक अनुभवी जर्नलिस्ट हैं जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह पिछले 4+ वर्षों से देश के प्रतिष्ठित डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म लाइव हिंदुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) से जुड़ी हुई हैं। यहां वह बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं। इससे पहले शुभांगी लगभग एक साल अमर उजाला डिजिटल में भी काम कर चुकी हैं।


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शुभांगी ने जर्नलिज्म के साथ-साथ एल.एल.बी की पढ़ाई भी की है, जिससे उनके कंटेंट में तथ्यात्मक मजबूती और संतुलित दृष्टिकोण देखने को मिलता है। वह पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़ने और लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम मानती हैं।

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