डाइट सही फिर भी वेट लॉस नहीं? जानें महिलाओं में स्लो फैट लॉस की असली वजह

Jan 24, 2026 09:17 am ISTShubhangi Gupta लाइव हिन्दुस्तान
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क्या सही डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद वजन कम नहीं हो रहा? न्यूट्रिशनिस्ट अवंती देशपांडे बता रही हैं कि भारतीय महिलाओं में वेट लॉस धीमा क्यों होता है और इसके पीछे कौन से हार्मोनल व लाइफस्टाइल कारण जिम्मेदार हैं।

डाइट सही फिर भी वेट लॉस नहीं? जानें महिलाओं में स्लो फैट लॉस की असली वजह

कई भारतीय महिलाएं यह शिकायत करती हैं कि वे पुरुषों जितनी मेहनत करने के बावजूद वजन कम नहीं कर पातीं। एक जैसी डाइट, वही वर्कआउट और फिर भी नतीजे अलग- इसका कारण आलस नहीं बल्कि शरीर की बनावट, हार्मोन और लाइफस्टाइल है। न्यूट्रिशनिस्ट अवंती देशपांडे के अनुसार, महिलाओं के शरीर की जरूरतें पुरुषों से बिल्कुल अलग होती हैं, इसलिए उनका वेट लॉस प्रोसेस भी अलग होता है।

  1. महिलाओं में मसल मास कम होना: महिलाओं के शरीर में प्राकृतिक रूप से मसल्स कम होती हैं। मसल्स जितनी ज्यादा होंगी, उतनी तेजी से कैलोरी बर्न होती है। कम मसल मास होने की वजह से फैट बर्निंग प्रोसेस धीमा हो जाता है।
  2. हार्मोनल उतार-चढ़ाव: पीसीओएस, थायरॉइड, पीरियड्स और मेनोपॉज जैसे हार्मोनल बदलाव महिलाओं के मेटाबॉलिज्म को सीधे प्रभावित करते हैं। अवंती देशपांडे बताती हैं कि इन स्थितियों में शरीर फैट स्टोर करने लगता है, खासकर पेट के आसपास।
  3. ज्यादा स्ट्रेस और कोर्टिसोल: भारतीय महिलाएं घर और काम की दोहरी जिम्मेदारी निभाती हैं, जिससे तनाव का स्तर ज्यादा रहता है। ज्यादा स्ट्रेस से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो पेट की चर्बी बढ़ाने का बड़ा कारण बनता है।
  4. प्रोटीन की कमी: अधिकतर भारतीय डाइट कार्बोहाइड्रेट-भरी होती है, जबकि प्रोटीन कम होता है। प्रोटीन मसल्स बनाने और फैट बर्न करने के लिए जरूरी है। इसकी कमी से वेट लॉस रुक जाता है।
  5. पोषक तत्वों की कमी: आयरन, विटामिन B12 और मैग्नीशियम की कमी महिलाओं में आम है। इससे थकान, मीठा खाने की क्रेविंग और लो एनर्जी जैसी समस्याएं होती हैं, जो वेट लॉस को मुश्किल बना देती हैं।
  6. नींद की कमी: नींद पूरी ना होने से भूख और फैट बर्निंग से जुड़े हार्मोन बिगड़ जाते हैं। इससे वजन घटने के बजाय बढ़ने लगता है।

हेल्थ टिप: अवंती देशपांडे के अनुसार, महिलाओं के लिए वेट लॉस का रास्ता अलग होना चाहिए। सही प्रोटीन, हार्मोन बैलेंस, स्ट्रेस मैनेजमेंट और अच्छी नींद- ये छोटे बदलाव लंबे समय में बड़ा फर्क ला सकते हैं। इसके अलावा किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए अन्य डॉक्टर से उचित सलाह ले सकते हैं।

Shubhangi Gupta

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