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बढ़ते प्रदूषण के बीच श्वास संबंधी समस्याओं से बचाएंगे ये 3 योगासन

Yoga Asanas To Boost Lung Health: हवा के प्रदूषित होने पर लोगों को खांसी, अस्थमा या सांस संबंधी कई तकलीफ आसानी से घेरने लगती हैं। अगर आप भी प्रदूषण के बढ़ते ही सांस संबंधी समस्याओं से परेशान होने लगते

बढ़ते प्रदूषण के बीच श्वास संबंधी समस्याओं से बचाएंगे ये 3 योगासन
Manju Mamgainलाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीMon, 30 Oct 2023 11:01 AM
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Yoga Asanas To Boost Lung Health: बढ़ते प्रदूषण की वजह से व्यक्ति को सेहत से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। प्रदूषित हवा में सांस लेने से आंखों में जलन, सर्दी-जुकाम, सिरदर्द, उल्टी जैसी दिक्कतें लोगों को परेशान करने लगती हैं। लेकिन वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर व्यक्ति के फेफड़ों पर पड़ता है। हवा के प्रदूषित होने पर लोगों को खांसी, अस्थमा या सांस संबंधी कई तकलीफ आसानी से घेरने लगती हैं। अगर आप भी प्रदूषण के बढ़ते ही सांस संबंधी समस्याओं से परेशान होने लगते हैं तो ये 3 योगासन आपकी सेहत को अच्छा बनाए रखने में आपकी मदद कर सकते हैं। जी हां, हजारों साल पुराने योग में कई ऐसे आसन हैं जो व्यक्ति के फेफड़ों की क्षमता में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। 

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उष्ट्रासन-
उष्ट्रासन करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर घुटनों के बल बैठते हुए अपने हाथों को कूल्हों पर रखें। इसके बाद अपनी पीठ को झुकाते हुए अपनी हथेलियों को अपने पैरों पर तब तक लेकर जाएं तब तक आपकी बाहें सीधी न हो जाएं। इसके बाद अपनी गर्दन को तटस्थ स्थिति में रखते हुए कुछ देर इसी मुद्रा में बने रहें। अब सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस पहले वाली मुद्रा में लौट आएं। अब अपने हाथों को वापस लेते हुए सीधा करके वापस अपने कूल्हों पर ले आएं।

भुजंगासन योग से फेफड़ों को लाभ
भुजंगासन को बैकबेंड पोज या कोबरा पोज भी कहा जाता है। भुजंगासन न केवल मानसिक शांति के लिए बल्कि छाती और फेफड़ों की सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है। भुजंगासन योग के नियमित अभ्यास से हृदय रोगों के खतरे को भी कम करने में मदद मिलती है। भुजंगासन योग करने के लिए सबसे पहले पेट के बल जमीन पर लेटकर अपनी दोनों हथेलियों को जांघों के पास जमीन की तरफ रखें। ऐसा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपके टखने एक-दूसरे को छूते रहें। इसके बाद अपने दोनों हाथों को कंधे के बराबर लाकर दोनों हथेलियों को फर्श की तरफ करें और अपने शरीर का वजन अपनी हथेलियों पर डालें, सांस भीतर खींचें और अपने सिर को उठाकर पीठ की तरफ खींचें। ध्यान दें कि इस वक्त तक आपकी कुहनी मुड़ी हुई है। इसके बाद अपने सिर को पीछे की तरफ खीचें और साथ ही अपनी छाती को भी आगे की तरफ निकालें। सिर को सांप के फन की तरह खींचकर रखें। लेकिन ध्यान दें कि आपके कंधे कान से दूर रहें और कंधे मजबूत बने रहें। इसके बाद अपने हिप्स, जांघों और पैरों से फर्श की तरफ दबाव बढ़ाते हुए शरीर को इस स्थिति में करीब 15 से 30 सेकेंड तक बनाए रखें और सांस की गति सामान्य बनाए रखें। ऐसा महसूस करें कि आपका पेट फर्श की तरफ दब रहा है। लगातार अभ्यास के बाद आप इस आसन को 2 मिनट तक भी कर सकते हैं। इस मुद्रा को छोड़ने के लिए, धीरे-धीरे अपने हाथों को वापस साइड पर लेकर आएं। अपने सिर को फर्श पर विश्राम दें। अपने हाथों को सिर के नीचे रखें। बाद में धीरे से अपने सिर को एक तरफ मोड़ लें और धीमी गति से दो मिनट तक सांस लें।

कपालभाति- 
वायु प्रदूषण से शरीर को बचाने के लिए रोजाना कपालभाति का अभ्यास भी फायदा देता है। इसे करने के लिए सबसे पहले सीधे बैठकर पेट के निचले हिस्से को अंदर की तरफ खींचे और नाक से तेजी से सांस छोड़ें। ऐसा तब तक करते रहे, जब तक आपको थकान न महसूस होने लगे। कपालभाति करने से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और मन शांत होता है। इस प्राणायाम को करने से सांस धीमी और शरीर स्थिर होने लगता है। खून साफ करने के लिए भी कपालभाति अच्छा प्राणायाम है।

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