
1 जापानी आदत जो तुरंत शांत कर दे दिमाग, न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता ने बताया
अगर घबराहट, बेचैनी या ओवरथिंकिंग अचानक बढ़ जाए, तो जापान की एक छोटी-सी आदत दिमाग को तुरंत शांत कर सकती है। न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह बताती हैं कि सफाई करना मानसिक तनाव कम करने में बेहद असरदार है।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में एंग्जायटी, बेचैनी और ओवरथिंकिंग लगभग हर दूसरे व्यक्ति की समस्या बन चुकी है। काम का दबाव, सोशल मीडिया का शोर और लगातार दिमाग में चलती चिंताएं मानसिक थकान को और बढ़ा देती हैं। ऐसे में लोग अक्सर जटिल थेरेपी या लंबी मेडिटेशन तकनीकों की तलाश करते हैं, जबकि सुकून पाने का एक बेहद सरल तरीका हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में ही छिपा है। जापान की एक माइंडफुल प्रैक्टिस के अनुसार, जब भी एंग्जायटी या बेचैनी महसूस हो तो सफाई शुरू कर दें। यह आदत दिमाग को नेगेटिव सोच से हटाकर एक्शन पर फोकस करना सिखाती है।
न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह बताती हैं कि यह तरीका दिमाग का फोकस चिंता से हटाकर वर्तमान पल में ले आता है। उनके अनुसार, यह आदत ना सिर्फ उन्होंने खुद आजमाई है, बल्कि उनके कई क्लाइंट्स ने भी इससे तुरंत मानसिक शांति महसूस की है।
एंग्जायटी होने पर क्या करें?
- बर्तन धोना शुरू करें हाथों की मूवमेंट और पानी की आवाज दिमाग को शांत करती है, ध्यान वर्तमान पल में आ जाता है।
- किसी एक ड्रॉअर की सफाई करें पूरा घर नहीं, बस एक छोटा हिस्सा साफ करें। ऐसा करने से कंट्रोल और सैटिस्फैक्शन का एहसास मिलता है।
- किसी कोने को डिक्लटर करें फालतू सामान हटाने से दिमाग भी हल्का महसूस करता है और अव्यवस्था कम होते ही बेचैनी भी घटती है।।
यह तरीका काम क्यों करता है?
- दिमाग का फोकस तुरंत शिफ्ट होता है: जब एंग्जायटी बढ़ती है, तो दिमाग बार-बार नेगेटिव थॉट्स में फंस जाता है। सफाई करने से ध्यान सोच से हटकर एक्शन पर चला जाता है और हाथों की मूवमेंट दिमाग को 'अब और यहीं' में लाती है।
- छोटे काम से कंट्रोल का एहसास मिलता है: एंग्जायटी में अक्सर चीजें बेकाबू लगती हैं। ऐसे में एक ड्रॉअर, शेल्फ या टेबल साफ करना फायदेमंद होता है। छोटे लक्ष्य पूरे होने से दिमाग को राहत मिलती है और 'मैं कुछ कर पा रहा/रही हूं' का भरोसा बढ़ता है।
- रिपिटेटिव मूवमेंट नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं: बर्तन धोना, कपड़े सलीके से रखना या झाड़ू लगाना- ये सभी रिपिटेटिव मूवमेंट होते हैं। नर्वस सिस्टम को सिग्नल मिलता है कि खतरा नहीं है और हार्ट रेट और बेचैनी धीरे-धीरे कम होती है।
- अव्यवस्था कम होते ही मानसिक बोझ भी घटता है: बिखरा हुआ वातावरण दिमाग को और थका देता है। डिक्लटरिंग से विजुअल नॉइज कम होता है और साफ जगह दिमाग को रिलैक्स होने का मौका देती है। मूड और फोकस दोनों बेहतर होते हैं
- माइंडफुलनेस अपने आप एक्टिव हो जाती है: इस आदत में अलग से मेडिटेशन की जरूरत नहीं होती। आप पानी की आवाज, चीजों की बनावट पर ध्यान देने लगते हैं और दिमाग भूत-भविष्य से निकलकर वर्तमान में आता है।
किसके लिए है सबसे ज्यादा फायदेमंद?
- ओवरथिंकिंग करने वाले लोग
- एग्जाम या वर्क स्ट्रेस से जूझ रहे स्टूडेंट्स
- घर से काम करने वाले प्रोफेशनल्स
- एंग्जायटी या रेस्टलेसनेस महसूस करने वाले लोग

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Shubhangi Guptaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




