वजन घटाने के लिए सेफ है वाटर फास्टिंग? क्या वाकई इससे हेल्थ को हो सकता है खतरा और साइड इफेक्ट
वजन घटाने के लिए आजकल लोग नए-नए तरीकों को फॉलो कर रहे हैं। इन नए तरीकों में से एक तरीका वाटर फास्टिंग है। अगर आप भी इस तरीके से वजन कम कर रहे हैं तो जानिए क्या वाकई ये सेफ है और क्या इससे कोई खतरा या साइड इफेक्ट भी है।

लगातार बढ़ते वजन से परेशान लोग अक्सर वजन घटाने के अलग-अलग तरीकों को खोजते हैं। वजन घटाने के लिए जिस तरीके को सबसे ज्यादा असरदार माना जाता है वह है अच्छी लाइफस्टाइल। जी हां, एक्सपर्ट मानते हैं कि संतुलित डायट और एक्टिव लाइफस्टाइल से वजन कम किया जा सकता है। हालांकि, आजकल वजन कम करने के कई दूसरे तरीके भी हैं जिन्हें फटाफट वजन कम करने के लिए असरदार माना जाता है। इन तरीकों में से एक है वाटर फास्टिंग। बहुत से सेलेब्रिटीज इस तरीके से वजन कम कर चुके हैं। एक्टर कुणाल खेमू भी इस तरीके को अपनाकर 9 किलो वजन कम कर चुके हैं। लेकिन क्या ये तरीका वाकई वजन घटाने के लिए सेफ है? क्या इससे हेल्थ को हो खतरा और साइड इफेक्ट हो सकता है? इस आर्टिकल में जानिए।
क्या है वाटर फास्टिंग
सबसे पहले ये समझना होगा कि वाटर फास्टिंग क्या होता है। वाटर फास्टिंग इंटरमिटेंट फास्टिंग, टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग या फिर मॉडिफाइड फास्टिंग से बिल्कुल अलग है। इसमें सिर्फ पानी पीना होता है और बाकी सभी तरह के खाने से परहेज करना होता है। इसमें आप कोई ठोस या लिक्विड कैलोरी वाला खाना नहीं खा सकते हैं।
क्या वजन घटाने के लिए ये तरीका सेफ है?
नहीं, वजन घटाने के लिए वाटर फास्टिंग अधिकांश लोगों के लिए सेफ तरीका नहीं माना जाता। इसमें केवल पानी पिया जाता है और कोई कैलोरी नहीं ली जाती। इससे शुरुआती दिनों में वजन कम हो सकता है, लेकिन ऐसा पानी और शरीर में जमा ग्लाइकोजन के कम होने के कारण होता है। खाना शुरू करने पर यह वजन अक्सर वापस बढ़ सकता है।
वाटर फास्टिंग से के रिस्क
- चक्कर आना
- थकान
- इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
- मांसपेशियों का नुकसान
- ध्यान लगाने में कठिनाई
- सिरदर्द
- लो ब्लड प्रेशर
- डिहाइड्रेशन
किन लोगों को नहीं करनी चाहिए वाटर फास्टिंग?
आपको ये समझना होगा कि वाटर फास्टिंग हर किसी के लिए सेफ नहीं है। इसे करने से पहले हमेशा डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। जानिए किन लोगों को इस फास्टिंग से बचना चाहिए-
- डायबिटीज के मरीज जो इंसुलिन या ग्लूकोज कम करने वाली दवाएं ले रहे हैं
- प्रेगनेंट या ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाएं
- कमजोर बुज़ुर्ग
- ईटिंग डिसऑर्डर वाले लोग
- क्रोनिक किडनी की बीमारी वाले
- कम ब्लड प्रेशर वाले
- दवा ले रहे लोग
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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