पेट निकला हुआ है? सिर्फ 21 दिनों तक ऐसे खा लें पपीता, फैटी लिवर से भी मिलेगी राहत!

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Papaya For Weight Loss: अगर आपका पेट भी बाहर निकला हुआ है, तो 21 दिनों तक ऐसे पपीता खा कर देखें। फैटी लिवर के लिए भी ये काफी फायदेमंद है। दरअसल ये कॉम्बिनेशन बॉडी डिटॉक्स में मदद करता है, इसलिए फैट भी नेचुरली कम होता है।

पेट निकला हुआ है? सिर्फ 21 दिनों तक ऐसे खा लें पपीता, फैटी लिवर से भी मिलेगी राहत!

आजकल का लाइफस्टाइल ही कुछ ऐसा हो गया है कि पेट निकलना एक आम समस्या बन चुकी है। घंटों लगातार बैठे रहना, फिजिकल एक्टिविटी का अभाव और गलत खानपान; इन सभी का असर बॉडी पर साफ दिखाई पड़ता है। कुछ लोग तो नॉर्मली पतले होते हैं लेकिन उनका पेट काफी बाहर होता है। ये देखने में भी खराब लगता है, साथ ही कई लाइफस्टाइल संबंधी बीमारियों की भी वजह बनता है। योग गुरु दीपक शर्मा एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताते हैं कि अगर आपका पेट बाहर निकला हुआ है, तो काफी ज्यादा चांस हैं कि आपका लिवर भी फैटी हो। ऐसे में अगर आप पपीते को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं तो काफी फायदा हो सकता है। 21 दिनों तक आपको नियमित पपीते का सेवन करना है, आइए जानते हैं कैसे।

फैट कम करने में कैसे फायदेमंद है पपीता?

पपीता एक ऐसा फल है, जिसमें पानी और फाइबर की मात्रा भरपूर होती है। इस वजह से पपीता पेट को साफ रखने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। अगर हेल्दी डाइट के साथ आप पपीते का नियमित सेवन कर रहे हैं, तो ब्लोटिंग और इन्फ्लेमेशन कम करने में फायदा मिल सकता है। इसे खाने से पेट भी भरा हुआ रहता है, इसलिए बार-बार भूख नहीं लगती, जिसका असर फैट पर पड़ता है।

बेली फैट कम करने के लिए ऐसे खाएं पपीता

योग गुरु दीपक शर्मा बताते हैं कि अगर आपका पेट बाहर निकला हुआ है, तो फैटी लिवर होने के चांस काफी ज्यादा हैं। ऐसे में आपको रोज एक प्लेट पका हुआ पपीता अपनी डाइट में शामिल जरूर करना चाहिए। इसे छीलकर टुकड़ों में काट लें, फिर ऊपर से जरा सी काली मिर्च बुरक कर खाएं। 21 दिनों तक लगातार आपको इसी तरह पपीते का सेवन करना है।

सुबह या शाम, कब खाना ज्यादा फायदेमंद है?

योग गुरु के मुताबिक अगर आप पपीते को शाम के समय अपनी डाइट में शामिल करें, तो काफी ज्यादा फायदेमंद रहता है। इसके बाद आप हल्का-फुल्का ही डिनर करेंगे, जिससे वेट लॉस में काफी मदद मिलती है। हालांकि आप अपनी सहूलियत के हिसाब से सुबह ब्रेकफास्ट में या फिर दोपहर में लंच करने से ठीक पहले भी एक प्लेट पपीता खा सकते हैं।

नेचुरल डिटॉक्स में करता है मदद

एक्सपर्ट की मानें तो पपीते पर हल्की सी काली मिर्च छिड़क कर खाने से बॉडी नेचुरली डिटॉक्स होने में मदद मिलती है। इससे लिवर भी हेल्दी बना रहता है और फैट भी धीरे-धीरे कम होने लगता है। हालांकि ध्यान रखें कि पपीता खाने के तुरंत बाद भारी या तला-भुना खाना ना खाएं। कोशिश करें कि 30 मिनट तक सिर्फ पानी या हल्का पानी लें।

इन बातों का भी ध्यान रखें

सिर्फ पपीता खाने से ही फर्क नहीं दिखेगा। इसके साथ आपको अपनी बाकी की डाइट और लाइफस्टाइल में सुधार करना भी जरूरी है। कोशिश करें कि 21 दिनों तक हल्का-फुल्का खाना जैसे दाल-चावल, रोटी या खिचड़ी जैसी चीजों का सेवन करें। साथ में किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी भी अपने रूटीन में शामिल करें। एक्सरसाइज के लिए टाइम नहीं है, तो कुछ देर खासतौर से खाना खाने के बाद जरूर वॉक करें।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

Anmol Chauhan

अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

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