
हार्ट अटैक को न समझ बैठें गैस की समस्या, डॉक्टर ने बताया कैसे पहचाने अंतर
गैस एक कॉमन समस्या है जिसके लक्षण अधिकतर लोग महसूस करते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके लक्षण हार्ट अटैक से मिलते हैं और ज्यादातर लोग हार्ट अटैक को गैस के लक्षण समझकर इग्नोर करते हैं। ऐसे में कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया है कि कैसे आप दोनों के अंतर को पहचाने।
बीते दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में हार्ट अटैक से मौत मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बहुत से लोग हार्ट अटैक के लक्षणों को समझने में कंफ्यूज होते हैं और कुछ लक्षणों को इग्नोर करना जान के लिए भारी पड़ जाता है। आजकल हार्ट अटैक से मौत के मामलों में 20 से कम उम्र के बच्चे भी शामिल हैं। इस समस्या के बढ़ने का एक कारण ये भी हैं कि कम उम्र में ही लोग डायबिटीज, हृदय रोग और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। अधिकतर लोग खासतौर से महिलाएं हार्ट अटैक और गैस के लक्षणों को समझने में कंफ्यूज होती हैं। ऐसे में कार्डियोलॉजिस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. नवीन भामरी ने नमह्या पॉडकास्ट को दिए एक इंटरव्यू में बताया है कि कैसे दोनों के लक्षणों को समझ सकते हैं।

क्या कहते हैं डॉक्टर
एक्सपर्ट कहते हैं कि इंडिया में गैस के लक्षण कॉमन हैं। उनके पास बहुत से ऐसे पेशेंट आते हैं जो कहते हैं कि उन्हें सीने में दर्द नहीं है, बस गैस है। डॉक्टर कहते हैं कि अक्सर गैस और हार्ट अटैक के लक्षण एक जैसे होते हैं, तो इग्नोर करने से बचना चाहिए। अगर आपको रोजाना ऐसे लक्षण महसूस हो रहे हैं तो आपको तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह लेनी चाहिए। छाती में भारीपन होना, डकार आना, उबकाई आना, हार्ट अटैक के लक्षण होते हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि डायबिटीज रोगी बुजुर्ग महिलाओं में इस तरह के साइलेंट अटैक होते हैं या फिर जिन लोगों का बीपी बहुत लंबे समय से बढ़ा रहता है उनके अंदर भी साइलेंट अटैक होते हैं। डॉ. नवीन कहते हैं कि अगर इस तरह के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक
डॉक्टर कहते हैं कि कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक दोनों में फर्क है। हार्ट अटैक का मतलब है दिल का दौरा पड़ना यानी जो आर्टरीज हार्ट को खून पहुंचाती हैं उनका अचानक से ब्लॉक होना। जब ये ब्लॉक होती हैं तो हार्ट की मसल्स को ऑक्सिजन नहीं मिलता, ऐसे में वो क्रेव करती हैं तो आपको चेस्ट पेन, पसीना आना और सांस लेने में परेशानी होती है। हालांकि, बीपी या पल्स थोड़ी बढ़ी हुई हो सकती है लेकिन पेशेंट सचेत रहता है और हॉस्पिटल जाने का समय मिलता है। जबकि कार्डियक अरेस्ट में हार्ट अचानक पंप करना बंद कर देता है। इसमें पल्स और बीपी भी दिखाई नहीं देते। इसमें पेशेंट बेसुध हो जाता है, ऐसे में सबसे अच्छा है कि बिना देरी करे सीपीआर देना शुरू करें।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। किसी चिकित्सीय स्थिति के बारे में किसी भी सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लें।

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