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लाल चोला और सफेद दाढ़ी: आखिर कैसे सांता को मिला उनका सिग्नेचर लुक?

लाल चोला और सफेद दाढ़ी: आखिर कैसे सांता को मिला उनका सिग्नेचर लुक?

संक्षेप:

सांता के इन कपड़ों का सफर सदियों पुराने इतिहास और धीरे-धीरे बदलते समाज की पसंद से जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं सांता के इस 'सिग्नेचर लुक' के पीछे के कौन से मुख्य कारण छिपे हुए हैं।

Dec 25, 2025 10:32 am ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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क्रिसमस का नाम सुनते ही आंखों के आगे चटख लाल रंग के कपड़े पहने सफेद रंग की लंबी दाढ़ी में एक बूढ़ा आदमी सांता के रूप में सामने आने लगता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, सांता हमेशा लाल रंग के कपड़े पहने ही क्यों नजर आते हैं, क्रिसमस की थीम हमेशा रेड एंड व्हाइट ही क्यों होती है? तो बता दें, सांता के इन कपड़ों का सफर सदियों पुराने इतिहास और धीरे-धीरे बदलते समाज की पसंद से जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं सांता के इस 'सिग्नेचर लुक' के पीछे के कौन से मुख्य कारण छिपे हुए हैं।

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संत निकोलस और पादरियों का लिबास

सांता क्लॉज का असली किरदार चौथी शताब्दी के संत निकोलस पर आधारित है। संत निकोलस तुर्की के मायरा इलाके में रहते थे। वे बहुत दयालु थे और गरीब बच्चों को चुपचाप तोहफे दिया करते थे। कई ऐतिहासिक चित्रों में संत निकोलस को लाल रंग के वस्त्रों में दिखाया गया है। उस दौर में पादरी अक्सर लाल और सफेद रंग के चोगे पहना करते थे। चर्च की परंपराओं में लाल रंग को बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता था। यहीं से सांता के कपड़ों के लिए लाल रंग की नींव पड़ी।

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पुरानी पेंटिंग्स और कार्टून्स का असर

सांता हमेशा से लाल कपड़ों में नहीं थे। 1800 के दशक की शुरुआत में सांता को कभी हरे, कभी भूरे और कभी नीले रंग के कपड़ों में दिखाया जाता था। लेकिन 1860 के दशक में मशहूर कार्टूनिस्ट थॉमस नास्ट (Thomas Nast) ने 'हार्पर्स वीकली' के लिए सांता के कई चित्र बनाए। समय के साथ उन्होंने सांता को लाल रंग के कोट में दिखाना शुरू किया, जो काफी लोकप्रिय हुआ और लोगों के मन में सांता की छवि लाल कपड़ों वाली ही बस गई।

खुशी और उत्साह का प्रतीक

लाल रंग ऊर्जा, उत्साह और प्यार का प्रतीक माना जाता है, जबकि सफेद रंग शांति और पवित्रता को दर्शाता है। क्रिसमस की ठंडी सफेद बर्फ के बीच सांता का वह चमकता हुआ लाल सूट एक उम्मीद और खुशी की किरण जैसा महसूस होता है।

कोका-कोला का 'जादुई' विज्ञापन (1931)

सांता के लाल कपड़ों से जुड़ा सबसे बड़ा और लोकप्रिय मिथक यह है कि कोका-कोला ने सांता को लाल रंग दिया। जबकि यह पूरी तरह सच नहीं है, लेकिन कोका-कोला ने सांता के इस लुक को 'अमर' जरूर बनाया। 1931 में कलाकार हैडन संडब्लॉम ने कोका-कोला के विज्ञापनों के लिए सांता की पेंटिंग बनाई। उन्होंने अपनी पेंटिंग में सांता को एक खुशमिजाज, गोल-मटोल और चमकीले लाल कपड़ों वाले व्यक्ति के रूप में दिखाया (जो कोका-कोला के ब्रांड कलर्स भी थे)। इन विज्ञापनों की वैश्विक पहुंच की वजह से दुनिया भर के लोगों के मन में सांता की यही 'लाल और सफेद' छवि बस गई।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain
मंजू ममगाईं लाइव हिन्दुस्तान में लाइफस्टाइल सेक्शन में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मंजू ने अपना पीजी डिप्लोमा भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली और ग्रेजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया हुआ है। इन्हें पत्रकारिता जगत में टीवी, प्रिंट और डिजिटल का कुल मिलाकर 16 साल का अनुभव है। एचटी डिजिटल से पहले मंजू आज तक, अमर उजाला, सहारा समय में भी काम कर चुकी हैं। आज तक में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन लीड करने के बाद अब मंजू एचटी डिजिटल में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए काम कर रही हैं। और पढ़ें

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