सबसे पहले किसने बनाई जींस और कहां बनी? मजदूरों के लिए बनी पैंट से मिला था आइडिया, जानें इतिहास

Mar 15, 2026 05:11 pm ISTDeepali Srivastava लाइव हिन्दुस्तान
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आजकल हर कोई जींस पहनना पसंद करता है, बच्चों से बूढ़ों तक के लिए अलग डिजाइन में जींस आने लगी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, जींस का इतिहास बेहद दिलचस्प है। जानें जींस की शुरुआत कब और कैसे हुई, यह भारत में कैसे पहुंची और कैसे डेनिम फैशन युवाओं से लेकर हर उम्र के लोगों की पसंद बन गया।

सबसे पहले किसने बनाई जींस और कहां बनी? मजदूरों के लिए बनी पैंट से मिला था आइडिया, जानें इतिहास

आजकल लड़के-लड़कियां, बच्चे-बूढ़े सभी जींस धड़ल्ले से पहनते हैं और ये काफी कंफर्टेबल भी रहती है। जींस अब कई नई स्टाइल और कलर में आ चुकी है, जो फैशनेबल दिखाती है। जींस लोगों के लिए स्टाइल स्टेटमेंट भी बन चुकी है और कंफर्टेबल आउटफिट भी। कही भी जाना हो बस जींस-टीशर्ट पहन लिया और चल दिए। महिलाओं ने कुर्ती, सूट के नीचे जींच पहनना शुरू कर दिया। यहां तक कि महिलाएं साड़ी-लहंगे के नीचे भी जींस पहन लेती हैं, जिससे सहज महसूस हो। लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर ये आरामदायक जींस आई कहां से, सबसे पहले इसे किसने बनाया और किसने पहना। कैसे मिला जींस का आइडिया, चलिए आज आपको पूरा इतिहास बताते हैं।

किसने बनाई जींस

जींस बनाने का पूरा श्रेय जर्मन मूल के व्यापारी लिवाई स्ट्रॉस (Levi Strauss) और दर्जी Jacob Davis को जाता है। आज भी आप लिवाई ब्रांड की जींस खूब पहन रहे हैं, वो इनकी ही देन है। दरअसल, अमेरिका में गोल्ड रश का समय चल रहा था और उस वक्त हजारों लोग सोने की खदानों में काम करने के लिए जाते थे। लिवाई में काम करने के लिए वहां पहुंच गए थे, वहां उन्होंने मजदूरों को फटे हाल में देखा। उन्होंने देखा कि मजदूरों की पैंट काम करते हुए फट जाती है और फिर अगले दिन उन्हें वही फटी पैंट पहनकर आना पड़ता है। उन्होंने सोचा कि ऐसा कपड़ा बनाया जाए, तो जल्दी फटे नहीं और लंबे समय तक टिका रहे।

दुनिया की पहली जींस

साल 1871 में नेवादा के दर्जी जैकब डेविस ने पैंट की जेबों को फटने से बचाने के लिए तांबे की छोटी कीलें लगाने का तरीका खोजा। लेकिन इस आइडिया को वह अपने नाम रजिस्टार नहीं करा पाए, उनके पास पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने लिवाई के साथ काम करने का फैसला किया। बस फिर दोनों ने मिलकर 20 मई 1873 को इस डिजाइन का पेटेंट हासिल किया और इसी दिन को जींस का जन्मदिन माना जाता है। बस फिर ये मजबूत पैंट किसानों, मजदूरों और अन्य लोगों की पहली पसंद बनी। ये टिकाऊ जींस खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लगने लगी। लिवाई जींस की मजबूती को लेकर काफी कॉन्फिडेंट थे कि उन्होंने इसके लिए जींस के चमड़े पर एक लेबल लगाया, जिसमें दो घोड़ों को एक जींस को विपरीत दिशा में खींचते हुए दिखा गया। आज भी लिवाई ब्रांड पर यही लेबल लगा रहता है।

लड़कियों के लिए जींस

जब पुरुषों को जींस पसंद आई तब इस कंपनी ने महिलाओं को ध्यान में रखते हुए साल 1934 में जींस बनाई, जिसको नाम दिया गया लेडी लिवाइस। इसके बाद लेडीज के लिए कई अलग स्टाइल में लिवाइस में जींस डिजाइन की गई। मजबूती के लिए लिवाइस ब्रांड ने लोगों में लाल रंग भी जोड़ा, ताकि वह ब्रांड यूनिक रहे। आज भी लिवाइस की जींस अपनी मजबूती के लिए जानी जाती है। इस तरह देखा जाए तो जींस का सफर मजदूरों के काम के कपड़े से शुरू होकर आज फैशन का अहम हिस्सा बन चुका है। भारत में भी यह विदेशी परिधान धीरे-धीरे लोगों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गया और आज यह हर अलमारी में आसानी से देखने को मिल जाता है।

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भारत कैसे आई

1980 के दशक में बॉलीवुड फिल्मों और पॉप कल्चर ने जींस को और लोकप्रिय बना दिया। फिल्मी सितारों को जींस पहनते देखकर युवाओं में इसका क्रेज तेजी से बढ़ने लगा। इसके बाद भारत में स्थानीय कंपनियों ने भी जींस बनाना शुरू किया। इसी दौरान भारतीय ब्रांड जैसे Flying Machine और Spykar ने बाजार में अपनी जगह बनाई। 1991 में भारत में आर्थिक उदारीकरण के बाद विदेशी ब्रांड्स के लिए बाजार खुल गया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय कंपनियां जैसे Levi's, Lee और Wrangler भारत में आईं, जिससे जींस का फैशन और तेजी से फैल गया। आज जींस भारत में सबसे लोकप्रिय कपड़ों में से एक है। यह न सिर्फ युवाओं बल्कि हर उम्र के लोगों की पसंद बन चुकी है और लगभग हर मौके पर पहनी जाने वाली ड्रेस बन गई है।

Deepali Srivastava

लेखक के बारे में

Deepali Srivastava

दीपाली श्रीवास्तव पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और 5 सालों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में डेप्युटी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान में साल 2021 में वेब स्टोरी से अपने सफर की शुरुआत करने के बाद, वह आज लाइफस्टाइल टीम का अहम हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, यूजर बिहेवियर और पाठकों की रुचि को समझने में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली कंटेंट प्रोफेशनल बनाती है।


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