अंग्रेजों को 'अश्लील' लगता था महिलाओं का ये गहना, लगा दिया था बैन; आज पूरी दुनिया है दीवानी!

Mar 09, 2026 08:47 pm ISTAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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क्या आप जानते हैं कि यह खूबसूरत आभूषण सिर्फ फैशन नहीं है, बल्कि इसका इतिहास हजारों साल पुराना है। समय के साथ इसका रूप जरूर बदला है लेकिन इसकी परंपरा आज भी उतनी ही खास है। चलिए जानते हैं इस खूबसूरत गहने का खूबसूरत इतिहास-

अंग्रेजों को 'अश्लील' लगता था महिलाओं का ये गहना, लगा दिया था बैन; आज पूरी दुनिया है दीवानी!

आजकल शादियों और बड़े फंक्शन में एक चीज तेजी से फिर से ट्रेंड में आ रही है, और वो है कमरबंद। साड़ी हो, लहंगा हो या इंडो-वेस्टर्न ड्रेस, कई महिलाएं अब अपनी ज्वैलरी के साथ कमरबंद पहनना खूब पसंद कर रही हैं। यह सिर्फ एक गहना नहीं रह गया, बल्कि पूरे लुक को खास बनाने वाला स्टाइल स्टेटमेंट बन चुका है। जब कोई महिला कमरबंद पहनती है तो उसका लुक और भी अट्रैक्टिव दिखाई देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह खूबसूरत आभूषण सिर्फ फैशन नहीं है, बल्कि इसका इतिहास हजारों साल पुराना है। समय के साथ इसका रूप जरूर बदला है लेकिन इसकी परंपरा आज भी उतनी ही खास है। चलिए जानते हैं इस खूबसूरत गहने का खूबसूरत इतिहास क्या है।

कमरबंद की शुरुआत कहां से हुई?

कमरबंद का इतिहास लगभग 4000 साल पुराना माना जाता है। इसकी शुरुआत प्राचीन फारस और सिंधु घाटी सभ्यता के समय से मानी जाती है। उस समय कमरबंद केवल महिलाओं का गहना नहीं था, बल्कि पुरुष भी इसे कमर पर बांधते थे। पहले के समय में इसका उपयोग केवल सुंदरता बढ़ाने के लिए नहीं किया जाता था, बल्कि एक उपयोगी वस्तु की तरह भी इसका इस्तेमाल किया जाता था। कई बार पुरुष इसमें छोटे हथियार या पैसे छिपाकर रखते थे। धीरे-धीरे यह केवल जरूरत की चीज ना रहकर एक खास आभूषण बन गया और महिलाओं के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ने लगी।

भारतीय परंपरा में कमरबंद

भारत में कमरबंद का एक खास सांस्कृतिक महत्व है। इसे कई जगहों पर करधनी भी कहा जाता है। शादी के समय दुल्हन को कमरबंद पहनाया जाता है, क्योंकि इसे सौभाग्य और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है। कुछ परिवारों में छोटे बच्चों को भी कमरबंद पहनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे बच्चों को बुरी नजर से बचाया जा सकता है। इसलिए यह आभूषण केवल सुंदरता बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि एक परंपरा के रूप में भी पहना जाता है।

ब्रिटिश सरकार से क्यों बैन किया कमरबंद

कहते हैं जब भारत पर ब्रिटिश हुकूमत का राज हुआ, तब उन्होंने कमरबंद पर बैन लगा दिया। कारण बड़ा दिलचस्प था। दरअसल उनके मुताबिक कमरबंद एक 'असभ्य' और 'अश्लील' गहना था, क्योंकि ये महिलाओं की कमर का हिस्सा उभार कर दिखाता था। बस फिर क्या अंग्रेजों की सभ्य की परिभाषा से कमरबंद ने मेल नहीं खाया और कमरबंद को पब्लिक में बैन कर दिया गया।

कैसे कमरबंद पहुंचा वेस्टर्न फैशन में

ब्रिटिश सरकार ने कमरबंद पर बैन तो लगा दिया लेकिन इसकी उपयोगिता पर जरूर उनका ध्यान गया। भारत के गर्म मौसम में भारी कोट पहनना उनके लिए मुश्किल होता था, इसलिए उन्होंने कमर पर बांधे जाने वाले कमरबंद को अपनी ड्रेस का हिस्सा बनाना शुरू किया। बाद में अंग्रेजों ने इसे Cummerbund नाम दिया, जो हिंदी शब्द 'कमरबंद' से ही लिया गया है। धीरे-धीरे यह वेस्टर्न कंट्रीज के फॉर्मल कपड़ों का हिस्सा बन गया और आज भी टक्सीडो सूट के साथ इसे पहना जाता है।

फैशन की दुनिया में कमरबंद का कम बैक

आज कमरबंद फिर से फैशन की दुनिया में तेजी से वापसी कर रहा है। कई बॉलीवुड एक्ट्रेसेज अपने लहंगे और साड़ी के साथ कमरबंद पहनती नजर आ रही हैं। अगर आप भी किसी खास मौके पर ट्रेडिशनल लुक ट्राई कर रही हैं, तो कमरबंद एक परफेक्ट एक्सेसरी हो सकती है जो आपके लुक में चार चांद लगा देगी।

Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

Anmol Chauhan

अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

विशेषज्ञता के क्षेत्र
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हेल्थ, फिटनेस और वेलनेस
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