कभी नवाबों की शान थी ये सलवार, अब फिर बन गई गर्ल्स की पहली पसंद; पढ़ें दिलचस्प कहानी
Farshi Salwar History: इंडिया से ले कर पाकिस्तान तक, गर्ल्स फर्शी सलवार पहनना पसंद कर रही हैं। यह सिर्फ एक फैशन पीस नहीं है, बल्कि इसका इतिहास भी काफी दिलचस्प और शाही रहा है। आइए जानते हैं-

आजकल फैशन की दुनिया में फर्शी सलवार फिर से तेजी से ट्रेंड कर रही है। इंडिया से ले कर पाकिस्तान तक, गर्ल्स इस खास तरह की सलवार को सूट के साथ पहनना पसंद कर रही हैं। इसका ढीला और फ्लोई स्टाइल लुक को बेहद रॉयल बना देता है। खास बात यह है कि यह सिर्फ एक फैशन पीस नहीं है, बल्कि इसका इतिहास भी काफी दिलचस्प और शाही रहा है। कभी यह सलवार नवाबों और शाही परिवार की महिलाओं की पहचान हुआ करती थी। आइए जानते हैं आज के समय में फैशन की दुनिया का नया ट्रेंड बने फर्शी सलवार के अनसुने किस्सों के बारे में।
स्टाइल ही तरह फर्शी सलवार का इतिहास भी शाही है
फर्शी सलवार का इतिहास मुगल काल से जुड़ा माना जाता है। उस समय नवाबों और शाही परिवारों की महिलाएं इसे पहनती थीं। यह सलवार उनकी शान और रुतबे की निशानी मानी जाती थी। 1970 से लेकर 1980 के दशक तक भी कई शाही और नवाबी परिवारों में इसका चलन देखने को मिलता था। उन दिनों की फिल्मों में भी ये पहनावा देखने को मिलता है। क्लासिक फिल्मों में कई हसीनाएं फर्शी सलवार में नजर आ चुकी हैं, जिससे इसका शाही अंदाज और भी ज्यादा मशहूर हुआ।
कहां से लिया गया ‘फर्शी’ शब्द?
फर्शी शब्द फारसी भाषा से लिया गया है। इसका मतलब होता है फ्लोर यानी जमीन या फर्श। आम सलवार जहां टखनों तक होती है, वहीं फर्शी सलवार की लंबाई इतनी होती है कि उसका कपड़ा जमीन को छूता है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। इसका फ्लोई और लंबा डिजाइन इसे बाकी सलवारों से अलग और ज्यादा अट्रैक्टिव बनाता है।
फर्शी सलवार बनाना है मुश्किल
फर्शी सलवार की सिलाई और कटिंग सामान्य सलवार से काफी अलग होती है। इसे बनाने में ज्यादा मेहनत और ज्यादा कपड़े की जरूरत पड़ती है। आम तौर पर इसे तैयार करने के लिए करीब 10 मीटर कपड़ा लगता है। इसके पोंचे का फ्रेम भी खास तरीके से बनाया जाता है, जो कम से कम 4 इंच का होता है। इस वजह से इसे डिजाइन करना हर दर्जी के लिए आसान काम नहीं होता। यही कारण है कि अगर आप इसे सिलवाते हैं तो कपड़ा भी ज्यादा लगेगा और सिलाई का खर्च भी ज्यादा हो सकता है।
पुरुषों से कैसे जुड़ा है फर्शी सलवार का कनेक्शन
सलवार का नाम सुनते ही आमतौर पर महिलाओं के कपड़ों की बात होती है, लेकिन फर्शी सलवार की कहानी थोड़ी अलग है। इसे महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुष भी पहनते रहे हैं। कई पारंपरिक मौकों पर पुरुष इसे शेरवानी या ओवरसाइज जैकेट के साथ पहनते थे। इससे पूरे लुक में एक रॉयल और शाही टच आ जाता था। आज भी कुछ लोग खास मौकों पर इस स्टाइल को अपनाते हैं।
कई साल बाद फिर लौटा ट्रेंड
कई दशकों तक फर्शी सलवार लगभग गायब सी हो गई थी। आम लोगों के बीच इसका नाम भी बहुत कम सुनने को मिलता था। लेकिन अब फैशन में ढीले और आरामदायक कपड़ों का ट्रेंड बढ़ने लगा है। इसी वजह से फर्शी सलवार भी फिर से चर्चा में आ गई है। इसका लूज और फ्लोई स्टाइल महिलाओं को स्टाइलिश के साथ-साथ कम्फर्टेबल भी लगता है। यही वजह है कि यह एक बार फिर फैशन ट्रेंड बन चुकी है।
शॉर्ट कुर्ती के साथ बनता है स्टाइलिश लुक
अगर आप अपने सूट वाले लुक को थोड़ा अलग और स्टाइलिश बनाना चाहती हैं, तो प्लाजो या शरारे की जगह फर्शी सलवार ट्राई कर सकती हैं। इसे शॉर्ट लेंथ कुर्ती के साथ पहनने से लुक काफी ट्रेंडी और एलिगेंट लगता है। चाहें तो आप इसे बिना दुपट्टे के भी कैरी कर सकती हैं। कई बॉलीवुड और पाकिस्तानी एक्ट्रेस भी इस स्टाइल को अपनाते हुए नजर आ चुकी हैं, जिससे इसका ट्रेंड और तेजी से बढ़ रहा है।
लेखक के बारे में
Anmol Chauhanअनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।
करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।
लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।
विशेषज्ञता के क्षेत्र
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