दीपक जलाने का सही तरीका जान लें, मंदिर की मूर्ति, दीवारों और छत पर नहीं जमेगी कालिख!
लगातार दीपक जलाने की वजह से मंदिर की दीवारों, मूर्तियों और छत के आसपास कालिख सी जमने लगती है। आज हम आपको इसी से जुड़े कुछ पारंपरिक तरीके बता रहे हैं, जिससे बाती भी अच्छे से जलेगी और मंदिर में कालिख भी जमा नहीं होगी।

घर का मंदिर सबसे पवित्र जगह होती है। हिंदू धर्म को मानने वाले लगभग हर घर में नियमित पूजा-पाठ किया जाता है और सुबह-शाम मंदिर में दीप प्रज्ज्वलित किया जाता है। हालांकि लगातार दीपक जलाने की वजह से मंदिर की दीवारों, मूर्तियों और छत के आसपास कालिख सी जमने लगती है। मूर्तियों से तो फिर ये साफ हो जाती है लेकिन दीवारों पर छत पर जमने वाले काले दाग हटने का नाम नहीं लेते। एक बार अच्छे से सफाई कर लो या पेंट करवा दो, फिर भी कुछ दिनों में कालापन जमना शुरू हो जाता है। दरअसल ऐसा आमतौर पर आपकी ही कुछ गलतियों की वजह से होता है। गलत तेल इस्तेमाल करना, बाती सही ना होना जैसी कुछ वजहें इसके पीछे जिम्मेदार होती हैं। आज हम आपको इसी से जुड़े कुछ पारंपरिक तरीके बता रहे हैं, जिससे बाती भी अच्छे से जलेगी और मंदिर में कालिख भी जमा नहीं होगी।
दीया जलाने के लिए सही तेल इस्तेमाल ना करना
दीपक में इस्तेमाल होने वाला तेल भी कालिख जमने की बड़ी वजह होता है। कुछ तेल जैसे सरसों का तेल या अरंडी का तेल काफी हेवी होते हैं और जलते हुए बहुत धुआं छोड़ते हैं। सबसे अच्छा है कि आप देसी घी से दीपक जलाएं। लेकिन देसी घी थोड़ा महंगा होता है इसलिए इसकी जगह आप तिल का तेल या नारियल का तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इनमें भी काफी कम धुँआ निकलता है।
हमेशा फ्रेश बाती का इस्तेमाल करें
एक ही बाती को बार-बार इस्तेमाल करने से भी धुआं ज्यादा निकलता है। इसलिए पूजा करते समय हमेशा फ्रेश बाती इस्तेमाल करनी चाहिए। हालांकि अगर आप हर बार नई बाती इस्तेमाल नहीं करने वाले हैं, तो उसकी जली हुई लौ को काट दें, फिर यूज करें। जी हां, आप कैंची का इस्तेमाल कर सकते हैं बस बाद में उसे मंदिर में ना रखें।
एक साथ दो बत्तियां इस्तेमाल करें
दीपक में इस्तेमाल करने के लिए हमेशा दो पतली रुई की बातियां लें और इन्हें आपस में रोल करते हुए एक बाती बना लें। इसके बाद बाती को अच्छे से घी या तेल में डुबोएं फिर दीपक में प्रज्ज्वलित करें। दो बाती इस्तेमाल करने की वजह से दीया काफी ब्राइट जलता है और घी में डुबोकर जलाने से कालिख भी कम बनती है।
सबसे जरूरी टिप: बाती की लंबाई सही रखें
दीया जलाने से मंदिर में कालिख ना जमा हो, इसके लिए सबसे जरूरी है कि आप बाती की लंबाई का ध्यान रखें। बाती की टिप जितनी ज्यादा लंबी होगी, वो उतनी ही तेज जलेगी और ज्यादा धुआं पैदा करेगी। इसलिए इसे छोटा ही रखें, लगभग 3-5 mm के साइज में। ये अच्छी तरह जलेगी भी, कम तेल या घी इस्तेमाल करेगी और कालिख भी नहीं जमेगी।
लेखक के बारे में
Anmol Chauhanअनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।
करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।
लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।
विशेषज्ञता के क्षेत्र
लाइफस्टाइल और डेली लाइफ हैक्स
हेल्थ, फिटनेस और वेलनेस
रिलेशनशिप और इमोशनल वेल-बीइंग
कुकिंग टिप्स, किचन हैक्स और आसान रेसिपी आइडियाज
फैशन और एथनिक स्टाइलिंग
ट्रैवल और सीजनल डेस्टिनेशन
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


