मुल्तानी मिट्टी की क्यों दीवानी थीं रानी-महारानियां? जानें पाकिस्तान से भारत आने की दिलचस्प कहानी
मुल्तानी मिट्टी आपने कभी न कभी अपने चेहरे पर जरूर लगाई होगी लेकिन क्या आप इसका इतिहास जानते हैं। चलिए बताते हैं आखिर मुल्तानी मिट्टी पाकिस्तान से भारत कैसे आई?

मुल्तानी मिट्टी कभी न कभी आपने चेहरे पर जरूर लगाई होगी और इसकी सोंधी सी महक भी आपको पसंद आई होगी। लेकिन क्या आपने कभी मुल्तानी मिट्टी के इतिहास के बारे में जानने की कोशिश की है। मुल्तानी मिट्टी सालों से फेस पैक के तौर पर इस्तेमाल की जा रही है और पुराने समय की रानी-महारानियां भी इसे लगाना पसंद करती हैं लेकिन ये भारत की नहीं है। जी हां, मुल्तानी मिट्टी पाकिस्तान से भारत तक का सफर तय करके आई है और उसके बाद यहां पर यह मशहूर हुई। चलिए आज आपको मुल्तानी मिट्टी का पूरा इतिहास बताते हैं और जानते हैं आखिर इसका नाम ये क्यों पड़ा और ये भारत कैसे आई?
पाकिस्तान में कहां पाई जाती है मुल्तानी मिट्टी
पाकिस्तान के शहर मुल्तान में ये मिट्टी पाई जाती है और वही से इसका नाम मुल्तानी मिट्टी पड़ा। यहां से मिट्टी को निकालकर इसका व्यापार पूरे देश में होता था। आज मुल्तान शहर पाकिस्तान में चला गया है लेकिन इसका व्यापार राजस्थान में बड़े स्तर पर सालों से किया जा रहा है। पाकिस्तान के मुल्तान शहर से राजस्थान तक का सफर मुल्तानी मिट्टी तय करती है और फिर पूरे भारत में जाती है।
कहां-कहां ज्यादा आती है मुल्तानी मिट्टी
राजस्थान के जोधपुर, बीकानेर, नागौर, बाड़मेर और जैसलमर में मुल्तानी मिट्टी का सबसे ज्यादा बिजनेस होता है। यहां से ये पूरे भारत में जाती है और फिर वहां से बाजार में बेची जाती है। गुजरात के कच्छ, मध्य प्रदेश के मुरैना और शिवपुरी और आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में भी इसका व्यापार होता है।
सौंदर्य का साधन
रानियां मुल्तानी मिट्टी को सौंदर्य का साधन मानती थी और इसे उबटन के तौर पर अपने शरीर पर रगड़वाती थी। ऐसा कहा जाता था कि ये त्वचा को निखारती है और ठंडक पहुंचाती है। हालांकि, मुल्तानी मिट्टी आज भी निखार और ठंडक के लिए इस्तेमाल की जाती है। मुल्तानी मिट्टी में गुलाब जल मिलाकर रानियां लगाया करती थीं।
मुल्तानी मिट्टी में कई चीजें होती हैं
मुल्तानी मिट्टी में कैल्शियम, सिलिका, आयरन और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में मौजूद होते है। इसमें पाया जाने वाला काओलिन त्वचा को ठंडक का एहसास देता है। इसके अलावा इसमें हाइड्रेटेड एल्युमिनियम सिलिकेट होता है, जो त्वचा के लिए फायदेमंद होता है। इसमें कई तत्वों के होने के कारण ये त्वचा पर लगाई जाती है और लोग इसे उबटन की तरह लगाते हैं।
नकली मिट्टी भी आने लगी है
असली मुल्तानी मिट्टी के साथ अब बाजार में नकली मुल्तानी मिट्टी भी धड़ल्ले से बिक रही है। ऐसे में जरूरी है कि आप असली-नकली में पहचान जानते हों और हमेशा सही मिट्टी ही चेहरे पर लगाएं। असली मुल्तानी मिट्टी आमतौर पर हल्के क्रीम, बेज या मिट्टी जैसे प्राकृतिक रंग की होती है। असली मिट्टी पानी डालने पर आसानी से पेस्ट बन जाती है और प्राकृतिक मिट्टी जैसी गंध उसमें से आती है।


