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16 अप्रैल, 2021|5:32|IST

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हां कहने से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है नहीं कहने की कला

success mantra

कई बार हम करना कुछ चाहते हैं, मगर करते कुछ और ही हैं। ऐसा करना इच्छा के विरुद्ध अपना समय बिताने जैसा ही है। लेकिन ऐसे भी लोग बहुतेरे हैं, जिनका जीवन उनके मनचाहे नहीं बीत रहा। लक्ष्य पीछे छूट गए हैं और वे अपनी जिंदगी से संतुष्ट नहीं हैं। ऐसी स्थिति में खुद को पाने से बचने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी जो चीज है, वह है- हां बोलने की आदत और नहीं कहने की क्षमता का न होना।

नहीं कहने की कला, हां कहने से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। इसे सीखने वाले बुरी आदतों से भी बचे रहते हैं और लक्ष्य साधने में भी आगे रहते हैं। यहां पर स्टीव जॉब्स को याद करें। वह कहते थे कि सिर्फ न बोलकर ही आप उस काम पर पूरा ध्यान दे सकते हैं, जो वाकई महत्वपूर्ण है।

हम ज्यादातर कामों में हां क्यों बोलते हैं, इसके बारे में मनोवैज्ञानिक स्टीव पीटर्स बताते हैं कि मस्तिष्क का एक हिस्सा है- चिंप। यह फूड, गॉसिप और क्षणिक प्रशंसा से आकर्षित होता है। इस हिस्से के कारण ही हम अपने प्रतिकूल जाने वाली बातों से राहत पाते हैं और हां कहते चले जाते हैं। जैसे हम जानते हैं कि मोटापा है, लेकिन दिमाग के इस हिस्से के कारण ही खाने को न नहीं कह पाते।

पीटर्स कहते हैं कि न कहने का अभ्यास करें। सबसे जरूरी यह है कि आप प्राथमिकता तय करें। खाना ही लेना हो, तो ऐसा लें, जो फायदेमंद हो या फिर कम से कम नुकसान करे। कार्यक्षेत्र में भी देखें, तो शुरुआत में लगता है कि हां कहना अच्छी आदत हैै, क्योंकि यह आपके लिए तारीफ लाता है, लेकिन एक समय ऐसा भी आता है कि आप खुद से खुश नहीं रह पाते।

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  • Web Title:The art of saying no is more important than saying yes