झारखंड के जयराम कौन? जिन्हें BJP की हार का बताया जा रहा जिम्मेदार; 2 महीने में ही जादू
जयराम महतो को राजनीति से जुड़े जानकार बीजेपी की हार का जिम्मेदार भी बता रहे हैं। आइए जानते हैं कौन हैं जयराम और क्या है इनका राजनीतिक जीवन।

झारखंड विधानसभा चुनाव का परिणाम आ चुका है। बीजेपी की हार और जेएमएम समेत सहयोगी दलों की जीत को राजनीतिक गलियारों में अपने-अपने हिसाब से समझाया-बताया जा रहा है। इस बीच एक नाम की चर्चा तेज हुई है। नाम है, जयराम महतो। राजनीति से जुड़े जानकार इन्हें बीजेपी की हार का जिम्मेदार भी बता रहे हैं। आइए जानते हैं कौन हैं जयराम और क्या है इनका राजनीतिक जीवन।
खुदको बताते, मॉडर्न एरा का भगत सिंह
जयराम कुमार महतो सोशल मीडिया पर काफी सक्रीय हैं। इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर उन्होंने अपने आपको मॉर्डन एरा का भगत सिंह बताया है। साथ ही साथ खुद को टाइगर जयराम भी कहते हैं। उनके एक्स(ट्विटर) अकाउंट में टाइगर जयराम महतो नाम लिखा हुआ है।
भाषा आंदोलन और आरक्षण की मांग
झारखंड में साल 2022 के दौरान भाषा आंदोलन हुआ था। इस दौरान वो सबसे पहले चर्चा में आए थे। यह आंदोलन झारखंड की स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने से जुड़ा था। झारखंड की भाषाओं से जुड़े आंदोलन के दौरान उन्होंने राज्य के मूल निवासियों को राज्य में मिलने वाली नौकरियों में आरक्षण देने की मांग भी की थी।
जयराम महतो को मिली पहली चुनावी जीत
राजनीति में कदम रखने वाले जयराम ने पहला चुनाव दो विधानसभा से लड़ा। इसमें एक से जीत तो दूसरी से हार मिली। जयराम डुमरी विधानसभा सीट से करीब 10945 वोटों से जीते हैं। उन्हें कुल 94496 वोट मिले हैं। जेएमएम की बेबी देवी को 83551 वोट मिले हैं। बेरमो सीट से जयराम को हार का सामना करना पड़ा। उन्हे कुल 60871 वोट मिले हैं। जयराम को कांग्रेस के अनूप सिंह ने 29375 वोटों से हराया है।
इनकी पार्टी ने ऐसे बढ़ाई बीजेपी की मुश्किलें
जयराम महतो का नाम झारखंड में काफी चर्चित है। उनकी एक राजनीतिक पार्टी है, जिसका नाम लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) है। इस विधानसभा चुनाव में पार्टी के 71 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। इसमें खुद जयराम भी शामिल थे। हालांकि पार्टी को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके साथ ही बीजेपी की जीत में रुकावटें भी पैदा कर दीं। क्योंकि अधिकांश उम्मीदवार बड़ी संख्या में वोट बटोरने में कामयाब हुए। इससे बीजेपी के वोट में भारी कटौती हो गई। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा जुगसलाई विधानसभा सीट व ईचागढ़ विधानसभा सीट की हुई, क्योंकि यहां के उम्मीदवारों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है।
आखिर कैसे जयराम जीतकर भी हारे
जयराम महतो की पार्टी ने कुल 81 विधानसभा में से 71 सीटों पर चुनाव लड़ा था। मगर उन्हें भारी हार का सामना करना पड़ा, क्योंकि अकेली अपनी सीट के बजाय उनकी पार्टी के सभी 70 उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं। आपको बता दें कि जयराम महतो बेरमो और डुमरी से चुनावी मैदान में थे। इसमें से उन्होंने डुमरी सीट पर जीत दर्ज की है। इस बड़ी हार के कारण कहा जा रहा है कि जयराम जीतकर भी हार गए हैं, क्योंकि पार्टी के प्रेसीडेंट होने के नाते इतनी बड़ी हार उनकी भी हार ही मानी जाएगी
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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