कौन हैं परिमल नथवानी और विजयसाई रेड्डी, झारखंड में निर्दलीय लड़ेंगे राज्यसभा चुनाव; JMM-कांग्रेस दोनों की बढ़ी टेंशन
झारखंड राज्यसभा चुनावों में जेएमएम-कांग्रेस की जीत की सबसे ज्यादा संभावना है, लेकिन 2 निर्दलीय और एक भाजपा नेता के नामांकन पत्र खरीदने की वजह से दोनों पार्टियों की टेंशन बढ़ गई है। आइए जानते हैं कौन हैं परिमल नथवानी और वी. विजयसाई रेड्डी

झारखंड का राज्यसभा चुनाव दिलचस्प हो गया है। यहां की राज्यसभा सीटों के लिए अब तक कुल 6 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र खरीद लिया है। इसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और बीजेपी के एक-एक नेता के साथ ही 2 निर्दलीय नेताओं ने भी पर्चा खरीदा है। जेएमएम-कांग्रेस की आपसी नाराजगी वाली टेंशन तो खत्म हो गई, लेकिन अब 2 निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र खरीदकर महागठबंधन की दोनों पार्टियों को टेंशन में डाल दिया है। दोनों नेताओं ने किसके आश्वासन या भरोसे पर ये नामांकन पत्र खरीदा है, ये वक्त बताएगा। आइए जानते हैं कि ये दोनों निर्दलीय प्रत्याशी कौन हैं।
3 बार के राज्यसभा सांसद हैं परिमल नथवानी
परिमल नाथवानी 3 बार के राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। नाथवानी झारखंड से दो बार और वाईएसआर की तरफ से आंध्र प्रदेश से भी एक बार राज्यसभा गए हैं। अपने राज्यसभा कार्यकाल के दौरान नाथवानी कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों का हिस्सा भी रहे हैं। अब नथवानी चौथी बार राज्यसभा जाने का ख्वाब लेकर झारखंड से नामांकन पत्र खरीदा है। ऐसे में सवाल है कि नथवानी ने आखिर किसके आश्वासन पर यह नामांकन पत्र खरीदा है या राज्यसभा के चुनावी रण में उतरने के फैसला किया है। इसका खुलासा 8 जून को नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान हो सकता है।
कौन हैं वी विजयसाई रेड्डी
झारखंड से राज्यसभा के लिए जिन 6 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र खरीदा है, उनमें वी. विजयसाई रेड्डी का भी नाम शामिल है। विजयसाई रेड्डी वाईएसआर कांग्रेस के महासचिव के साथ ही राज्यसभा के सांसद भी रह चुके हैं। विजयसाई रेड्डी संसदीय समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं। इसके अलावा तिरूपति देवास्थानम के न्यासी भी रहे हैं। अब उन्होंने झारखंड से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र खरीदा है। ऐसे में सवाल फिर से उठता है कि विजयसाई रेड्डी ने किसके भरोसे पर नामांकन पत्र खरीदा है।
झामुमो से बैद्यनाथ को प्रत्याशी बनाने के मायने
बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाकर झामुमो ने न केवल अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं, बल्कि अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधित्व को भी मजबूती देने का संदेश दिया है। पार्टी को उम्मीद है कि उनके अनुभव का लाभ राज्यसभा चुनाव में मिलेगा। गुरुजी शिबू सोरेन के बाद रिक्त हुई सीट दलित वर्ग से आने वाले बैद्यनाथ राम को देने का फैसला करके हेमंत ने आदिवासी के साथ -साथ दलित वर्ग को संदेश दिया है। यही नहीं पलामू प्रमंडल से झारखंड बनने के बाद पहली बार किसी दलित को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है।
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