'अब सशस्त्र विद्रोह असंभव', शीर्ष माओवादी नेता ने मौत से पहले जेल से लिखा मिसिर बेसरा को पत्र; एक बड़ी अपील

Apr 12, 2026 07:14 am ISTMohammad Azam हिन्दुस्तान, रांची
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कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेता प्रशांत बोस ने रांची जेल में अपनी मौत से पहले मिसिर बेसरा को पत्र लिखा था। पत्र में प्रशांत बोस उर्फ किशन दा ने मिसिर बेसरा से अपील की थी कि अब सशस्त्र संघर्ष छोड़कर मुख्य धारा में वापस आ जाना चाहिए।

'अब सशस्त्र विद्रोह असंभव', शीर्ष माओवादी नेता ने मौत से पहले जेल से लिखा मिसिर बेसरा को पत्र; एक बड़ी अपील

कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के शीर्ष नेता रहे प्रशांत बोस उर्फ किशन दा की रांची जेल में तीन अप्रैल को मौत हो गई थी। अपनी मृत्यु से पहले किशन दा ने संगठन को लेकर एक पत्र लिखा था। किशन दा ने बीते 20 मार्च को यह पत्र कॉमरेड सागर (मिसिर बेसरा) को संबोधित करते हुए लिखा था। पत्र की भाषा में संगठन की हताशा और चिंता साफ झलकती है।

किशन दा ने संगठन के लोगों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी। साथ ही यह भी स्वीकारा था कि संगठन वर्तमान में अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। उनके अनुसार देश की वर्तमान राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे के बीच सशस्त्र विद्रोह को आगे ले जाना अब लगभग असंभव है। संगठन के पास न तो अब पहले जैसा जनसमर्थन है और न ही सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव का सामना करने की शक्ति।

संगठन पर सवाल उठाए, किया प्रहार

प्रशांत बोस ने पत्र में कुछ ऐसे कड़े सवाल उठाए हैं जो संगठन के अस्तित्व पर प्रहार करते हैं। पत्र के अंत में किशन दा ने कॉमरेड सागर से एक गुप्त फोन नंबर के जरिए जल्द संपर्क करने और प्रतिक्रिया देने को कहा था।

जल्दी प्रतिक्रिया मांगी थी

किशन दा ने मिसिर बेसरा को लिखी चिट्ठी में अत्यंत सतर्कता और सावधानी बरतने की अपील की थी। साथ ही कहा था कि जल्द से जल्द उनके वक्तव्य पर प्रतिक्रिया भेजें और सारे विषय को गुप्त रखें। हालांकि इस संवाद के प्रभावी होने से पहले ही किशन दा का निधन हो गया। उनकी चिट्ठी हिन्दी में लिखी गई है पर उसके कई वाक्य अंग्रेजी में भी मिसिर बेदरा को संबोधित करते लिखे गए हैं।

क्या दी सलाह

अपने पत्र में किशन दा ने रणनीतिक क्षेत्रों, विशेष रूप से सेंट्रल रीजनल ब्यूरो और ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो का जिक्र किया है। उन्होंने कॉमरेड सागर (मिसिर बेसरा) से यह सोचने का आग्रह किया है कि सशस्त्र संघर्ष को सही मायनों में अभी क्या आगे बढ़ाकर ले जाना संभव है। उनके विचार से संगठन के लोगों को गंभीर रूप से इस मुद्दे पर सोचना चाहिए। कई बड़े कैडरों का मारा जाना या आत्मसमर्पण करना संगठन की कमर तोड़ चुका है। इसी नुकसान के मद्देनजर उन्होंने ‘सशस्त्र संघर्ष’ पर पुनर्विचार करने की सख्त सलाह दी।

आप बताएं- अब संघर्ष आगे ले जाना संभव है क्या

अपील: संगठन के लोगों को अब मुख्यधारा में लौट जाना चाहिए

स्वीकारा: संगठन अभी अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा

चिंता: राजनीति और सुरक्षा ढांचे के बीच सशस्त्र विद्रोह आगे ले जाना अब असंभव

दबाव: संगठन के पास अब पहले जैसा नहीं रहा जनसमर्थन

दुर्बलता: सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव से नहीं कर सकते सामना

Mohammad Azam

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संक्षिप्त विवरण

मोहम्मद आजम पिछले 3.5 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में बतौर कंटेंट प्रोडूसर काम कर रहे हैं।


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परिचय और अनुभव: मोहम्मद आजम पिछले तीन सालों से ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। कम समय में आजम ने पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया की बारीकियां सीखी हैं और अब भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट न्यूज टीम में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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आजम ने ग्रेजुएशन तक विज्ञान की पढ़ाई की है, लेकिन राजनीतिक विषयों में रुचि उनको पत्रकारिता की तरफ खींच लाई। आजम ने अपना पोस्ट ग्रेजुएशन देश के अग्रणी संस्थानों में से एक भारतीय जनसंचार संस्थान से पूरा किया। विज्ञान बैकग्राउंड होने के चलते आजम को फैक्ट आधारित पत्रकारिता करने में महारत हासिल है।


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आजम की देश की राजनीति में काफी रुचि है। आजादी के पहले से लेकर आजादी के बाद की राजनीतिक घटनाओं की कई किताबों का अध्ययन होने के चलते अच्छी समझ है। यही कारण रहा कि आजम ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत राजनीतिक बीट से की। राजनीति के साथ आजम क्राइम और सोशल मीडिया पर वायरल चल रही खबरों में भी अच्छी महारत हासिल है।


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