झारखंड से होली पर 10 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलेंगीं, बिहार के यात्रियों को भी फायदा; देखें रूट
झारखंड में होली पर्व के दौरान ट्रेनों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के रांची रेल मंडल ने 10 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। इससे झारखंड सहित बिहार के यात्रियों को भी काफी सुविधा होगी।

झारखंड में होली पर्व के दौरान ट्रेनों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के रांची रेल मंडल ने 10 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। इससे झारखंड सहित बिहार के यात्रियों को भी काफी सुविधा होगी।
मंडल की सीनियर डीसीएम शुचि सिंह ने बताया कि हर वर्ष त्योहारों के समय यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि होती है, जिससे नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त ट्रेनों और कोच की व्यवस्था की गई है।
रेल मंडल द्वारा हटिया-दुर्ग, सांतरागाछी-अजमेर, रांची-झंझारपुर, रांची-गोरखपुर, टाटानगर-कटिहार, गोंदिया-पटना, तिरुपति-रक्सौल, चर्लपल्ली-पटना, चर्लपल्ली-रक्सौल तथा भुवनेश्वर-धनबाद जैसे प्रमुख रूटों पर स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। ये ट्रेनें फरवरी के अंतिम सप्ताह से मार्च के अंत और अप्रैल के शुरुआती दिनों तक अलग-अलग तिथियों में संचालित होंगी।
हटिया से दुर्ग और दुर्ग से हटिया के बीच मार्च माह में सप्ताह में दो दिन विशेष ट्रेन चलेगी। सांतरागाछी से अजमेर और अजमेर से सांतरागाछी के बीच साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन की सुविधा दी जाएगी। रांची से झंझारपुर तथा झंझारपुर से रांची के बीच भी प्रत्येक सप्ताह होली स्पेशल ट्रेन चलेगी, जिससे झारखंड और बिहार के यात्रियों को लाभ मिलेगा। रांची-गोरखपुर रूट पर भी साप्ताहिक विशेष सेवा उपलब्ध रहेगी।
इसके अलावा पटना से चर्लपल्ली और चर्लपल्ली से पटना के बीच वाया रांची स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। चर्लपल्ली-रक्सौल तथा तिरुपति-रक्सौल के बीच भी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। टाटानगर-कटिहार और गोंदिया-पटना के बीच एक-एक ट्रिप की विशेष सेवा दी जाएगी। भुवनेश्वर-धनबाद रूट पर प्रतिदिन स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की गई है, जिससे झारखंड और ओडिशा के यात्रियों को विशेष राहत मिलेगी।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन ट्रेनों के संचालन से वेटिंग लिस्ट कम होगी और यात्रियों को त्योहार के दौरान सुरक्षित व सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा। यात्रियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और इसे समयानुकूल निर्णय बताया है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


