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चंपाई सोरेन सरकार की बड़ी परीक्षा आज, क्या है फ्लोर टेस्ट और कैसे होती है पूरी प्रक्रिया

रिजॉर्ट पॉलिटिक्स के बाद सभी 36 विधायकों रांची वापस लाया जा चुका है। थोड़ी ही देर में झारखंड सरकार का फ्लोर टेस्ट होना है। पूर्व मुख्यमंत्री भी इसमें हिस्सा लेने के लिए विधानसभा पहुंच गए हैं।

चंपाई सोरेन सरकार की बड़ी परीक्षा आज, क्या है फ्लोर टेस्ट और कैसे होती है पूरी प्रक्रिया
Aditi Sharmaलाइव हिन्दुस्तान,रांचीMon, 05 Feb 2024 11:03 AM
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झारखंड के लिए आज का दिन बेहद अहम है। आज झारखंड की नवनियुक्त चंपाई सोरेन सरकार की अग्निपरीक्षा है। सरकार बहुमत का दावा कर रही है लेकिन कहीं ना कहीं जोड़ तोड़ का डर भी सता रहा है। रिजॉर्ट पॉलिटिक्स के बाद सभी 36 विधायकों को रांची वापस लाया जा चुका है। थोड़ी ही देर में झारखंड सरकार का फ्लोर टेस्ट होना है। पूर्व मुख्यमंत्री भी इसमें हिस्सा लेने के लिए विधानसभा पहुंच गए हैं। ऐसे में सबकी निगाहें फ्लोर टेस्ट पर टिंकी हुई है। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर फ्लोर टेस्ट है क्या और पूरी प्रक्रिया कैसे होती है।

फ्लोर टेस्ट उस प्रक्रिया को कहा जाता है जिसमें मुख्यमंत्री विधानसभा में ये साबित करते हैं कि उनकी सरकार को अभी भी विधायकों का समर्थन प्राप्त है या नहीं। राज्यपाल मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कहते हैं।  दरअसल विधानसभा में जिस भी पार्टी को बहुमत प्राप्त होता है, राज्यपाल उस दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं।  

लेकिन जब इस बहुमत पर सवाल उठाया जाता है तो उसी दल के नेता को विधानसभा में बहुमत साबित करना होता है। इस दौरान अगर मुख्यमंत्री बहुमत साबित करने में नाकाम होते हैं तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ता है। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है तो संसद और विधानसभा दोनों जगह होती है। राज्य विधानसभा में फ्लोर टेस्ट विधानसभा के अध्यक्ष कराते हैं। राज्यपाल की इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की दखलअंदाजी नहीं होती। वह केवल मुख्यमंत्री को बहुमत साबित करने का आदेश देते हैं।

कैसे होता है फ्लोर टेस्ट

फ्लोर टेस्ट के दौरान सभी विधायकों को विधानसभा में मौजूद रहना पड़ता है। इसके बाद वह अपना-अपना वोट देते हैं। इससे पहले सभी पार्टियां विधायकों को हर हाल में विधानसभा में पेश होने के लिए व्हिप जारी करती हैं। वहीं कोई भी भी विधायक अगर व्हिप का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ दल बदल कानून के तहत कार्रवाई होती है। 

बता दें, झारखंड में कुल 81 विधानसभा सीटें हैं। हालांकि इनमें से एक सीट खाली है। ऐसे में 80 सीटों पर बहुमत का आंकड़ा 41 है। सत्तारूढ़ गठबंधन के पास बहुतमत के आंकड़े 41 से पांच अधिक विधायक हैं। 

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