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एक किमी चलते हैं पथरीली पगडंडी फिर मिलता है थोड़ा पानी, झारखंड के इस गांव की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन?

खूंटी को जिला बने 17 साल हो गए। लेकिन खूंटी जिले का एक ऐसा गांव जहां आज भी पीने को पानी और चलने के लिए रास्ता यहां के आदिवासियों को नसीब नहीं हुआ। आइये जानते हैं गांव के लोग क्या कहते हैं।

एक किमी चलते हैं पथरीली पगडंडी फिर मिलता है थोड़ा पानी, झारखंड के इस गांव की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन?
Mohammad Azamलाइव हिन्दुस्तान,खूंटीSat, 24 Feb 2024 10:54 PM
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खूंटी को जिला बने 17 साल हो गए। लेकिन खूंटी जिले का एक ऐसा गांव जहां आज भी पीने को पानी और चलने के लिए रास्ता यहां के आदिवासियों को नसीब नहीं हुआ। हम बात कर रहे हैं अड़की प्रखंड की मदहातू पंचायत के मालूटी गांव की। यहां दो टोले हैं ऊपर और नीचे टोली। ऊपरटोली के लोग पीने के पानी की समस्या को लेकर परेशान हैं तो नीचेटोली तक जाने के लिए पहाड़ी की पगडंडी के सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं है।

ऊपरटोली में 17 परिवार हैं, जहां पीने को पानी नहीं हैं। यहां की महिलाएं हर दिन खाली डेकची-बर्तन लेकर पत्थरों से अटे-पटे रास्तों से होकर एक किमी नीचे उतरकर डउडंग डोभा जाती हैं। इस डोभा में सालोंभर पहाड़ के नीचे से पानी आता है। महिलाएं डोभा के पानी में बर्तन धोती हैं और पहाड़ के नीचे जहां से पानी निकलता है, उस पानी का उपयोग पीने के लिए करती हैं। डेकची में पानी भरकर छोटी-छोटी बच्चियां और महिलाएं जब अपने घर की ओर बढ़ती हैं, तब उनका दर्द उनके चेहरे बयां करते हैं। पथरीली रास्ते पर धीरे-धीरे पानी लेकर महिलाएं एक किमी की दूरी तय कर अपने घर पहुंचती हैं, तो उन्हें लगता है कि वे अमृत लेकर घर आई हैं। ऐसे ही हर दिन पांच बार महिलाएं जब पानी लाती हैं, तब जाकर उनके घर के पानी की जरूरत पूरी होती है। वर्षों से गांव के लोग प्रखंड प्रशासन से पानी की समस्या दूर करने के लिए एक चापाकल मांग रहे हैं, परंतु उनकी कोई सुनता ही नहीं। नेता भी इनकी परवाह नहीं करते। इस कारण इस टोले के लोगों का शासन-प्रशासन से विश्वास उठता जा रहा है।

चार पहिया वाहन नहीं पहुंच पाता
मालूटी गांव के नीचे टोली की दूरी ऊपरटोली से लगभग दो किमी है। लेकिन यहां चार पहिया वाहन नहीं पहुंच पाता है। नए लोगों के लिए नीचेटोली तक पहुंचना आसान नहीं है। टोली के लोग पगडंडियों से होकर पैदल आना-जाना करते हैं। गांव के लोग बताते हैं कि सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती माताओं को अस्पताल पहुंचाने में होता है। गर्भवती माताओं को गांव के पुरुष खाट पर लादकर ऊपर मालूटी तक लाते हैं, जहां से किसी वाहन के माध्यम से उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया जाता है।

क्या कहते हैं ग्रामीण
बुदू बांदू सोय कहते हैं कि हम लोग मांग करते रहे, परंतु आज तक एक चापाकल नहीं लगा। पांच साल पहले नेता आए थे, चापाकल लगवाने का आश्वासन दिया था, परंतु चापाकल नहीं लगा और फिर चुनाव आ गया। अब नेता फिर आश्वासन देने आएंगे।

ऊपर मलूटी के रहने वाले सोमा स्वांसी कहते हैं कि आज तक गांव में पेयजल विभाग के लोग नहीं आए। एक चलंत पंपसेट गांव में दिया गया है, परंतु पानी नहीं है, पेपसेट फेंका हुआ है। हर दिन सुबह उठकर हमलोग पानी की चिंता करते हैं। बहुत नेता और अफसर हैं, परंतु हम लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी
खूंटी के उपायुक्त लोकेश मिश्रा का कहना है कि पहले भी यह मामला मेरे संज्ञान में आया था। पीएचईडी के लोगों ने कहा था कि पहाड़ पर गांव है, बोरिंग फेल हो चुकी है। इस कारण अब जल जीवन मिशन के तहत इस गांव को शामिल कर समस्या का समाधान किया जाएगा।

इस मामले में खूंटी जिले के कार्यपालक अभियंता सुरेंद्र कुमार दिनकर कहते हैं कि मुझे मामले की कोई जानकारी नहीं है। मैं अपने जेई से बात करूंगा, उसके बाद सोमवार को इस संबंध में बतलाऊंगा।

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