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Hindi News झारखंडफिर झारखंड के दौरे पर गृहमंत्री अमित शाह, BSF के प्रोग्राम में होंगे शामिल; 2 दिन के प्रोग्राम में ये-ये काम

फिर झारखंड के दौरे पर गृहमंत्री अमित शाह, BSF के प्रोग्राम में होंगे शामिल; 2 दिन के प्रोग्राम में ये-ये काम

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 1 दिसंबर को झारखंड के हजारीबाग में सीमा सुरक्षा बल के 59वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। अधिकारियों के मुताबिक, गृह मंत्री के गुरुवार शाम रांची पहुंचेंगे।

फिर झारखंड के दौरे पर गृहमंत्री अमित शाह, BSF के प्रोग्राम में होंगे शामिल; 2 दिन के प्रोग्राम में ये-ये काम
Abhishek Mishraएएनआई,हजारीबागThu, 30 Nov 2023 01:16 PM
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2024 से पहले झारखंड में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का दौरा बढ़ गया है। सूबे में भाजपा सत्ता की वापसी की राह भी देख रही है इसके साथ ही साथ लोकसभा चुनाव में अधिकतम सीटें जीतने की कवायद में जुटी हुई है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह एक बार फिर सूबे के दौरे पर आ रहे हैं। अमित शाह आज शाम झारखंड पहुंचेंगे। वो कल BSF के रेजिंग डे परेड में शामिल होंगे।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 1 दिसंबर को झारखंड के हजारीबाग में सीमा सुरक्षा बल के 59वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। अधिकारियों के मुताबिक, गृह मंत्री के गुरुवार शाम तक झारखंड की राजधानी रांची पहुंचने की उम्मीद है। शाह हजारीबाग पहुंचते ही बीएसएफ के शीर्ष अधिकारियों से बातचीत करेंगे।

गृहमंत्री 1 दिसंबर की सुबह हजारीबाग के रानी झांसी परेड ग्राउंड प्रशिक्षण केंद्र और स्कूल में स्थापना दिवस कार्यक्रम में भाग लेंगे। रानी झांसी परेड ग्राउंड प्रशिक्षण केंद्र बीएसएफ का सबसे पुराना प्रशिक्षण केंद्र है और हजारीबाग के मेरू में स्थित है। यहां यह समारोह पहली बार आयोजित किया जा रहा है।

बीएसएफ ने कहा कि गृह मंत्री ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सहमति दे दी है और वह औपचारिक परेड की सलामी लेंगे और सुबह 11 बजे के आसपास बल को संबोधित करेंगे। 

कार्यक्रम के अनुसार, गृह मंत्री को कार्यक्रम में दो घंटे से अधिक समय बिताना है, जिसमें औपचारिक परेड में सलामी, बीएसएफ कर्मियों को संबोधित करना, प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम और हथियार प्रदर्शनी और फोटो गैलरी का दौरा शामिल है।

बीएसएफ, जो लगभग 2.5 लाख कर्मियों की ताकत के साथ दुनिया का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल है, हर साल 1 दिसंबर को अपना स्थापना दिवस मनाता है। भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा की रक्षा के लिए नियुक्त, बीएसएफ देश का एकमात्र फोर्स है जिसकी युद्धकाल के साथ-साथ शांतिकाल में भी स्पष्ट रूप से परिभाषित भूमिका है। बल ने सीमा पर शांति सुनिश्चित करते हुए युद्ध और शांति के समय में उसे सौंपे गए हर कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने में अपनी क्षमता साबित की है।

सबसे चुनौतीपूर्ण इलाके और दूरदराज के स्थानों पर तैनात बीएसएफ के जवान पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ भारत की सीमाओं के संरक्षक के रूप में काम कर रहे हैं। 1965 तक, पाकिस्तान के साथ भारत की सीमा पर राज्य सशस्त्र पुलिस बटालियन तैनात थी। 9 अप्रैल, 1965 को पाकिस्तान ने कच्छ में सरदार पोस्ट, छार बेट और बेरिया बेट पर हमला कर दिया। इसने सशस्त्र आक्रमण से निपटने के लिए राज्य सशस्त्र पुलिस की अपर्याप्तता को उजागर किया, जिसके कारण भारत सरकार को एक विशेष, केंद्र नियंत्रित सीमा सुरक्षा बल की आवश्यकता महसूस हुई जो पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी रखने के लिए सशस्त्र और प्रशिक्षित हो।

सचिवों की समिति की सिफारिशों के परिणामस्वरूप 1 दिसंबर, 1965 को सीमा सुरक्षा बल अस्तित्व में आया। प्रारंभ में 1965 में बीएसएफ की स्थापना 25 बटालियनों के साथ की गई थी और समय बीतने के साथ, पंजाब, जम्मू और कश्मीर और पूर्वोत्तर क्षेत्र में आतंकवाद से लड़ने के लिए देश की आवश्यकता के अनुसार इसका विस्तार किया गया था।

वर्तमान में, बीएसएफ के पास 192 (तीन एनडीआरएफ सहित) बटालियन और सात बीएसएफ आर्टिलरी रेजिमेंट हैं जो पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा की रक्षा करते हैं। इसके अलावा, बीएसएफ कश्मीर घाटी में घुसपैठ विरोधी, उत्तर पूर्व क्षेत्र में उग्रवाद विरोधी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्यों में नक्सल विरोधी अभियान और पाकिस्तान और बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर एकीकृत जांच चौकियों की सुरक्षा में भी भूमिका निभा रहा है।  

 

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