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पटरी पर बैठ गेम खेल रहे दो लड़के नहीं सुन पाए ट्रेन की आवाज, राजधानी से दोनों कटे

मृत दोनों किशोरों के घर की माली हालत ठीक नहीं है। मुबारक के पिता शुडू साह पंक्चर की दुकान में काम कर घर का खर्चा चलाते हैं। खुद मुबारक भी इलेक्ट्रिक दुकान में काम करता था।

पटरी पर बैठ गेम खेल रहे दो लड़के नहीं सुन पाए ट्रेन की आवाज, राजधानी से दोनों कटे
Devesh Mishraहिन्दुस्तान,श्रीबंशीधर नगर (गढ़वा)Tue, 21 May 2024 07:59 AM
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रेलवे पटरी पर बैठकर मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेल रहे दो किशोरों की मौत हटिया-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस से कटकर हो गई। घटना रविवार रात करीब 10 बजे गढ़वा रोड-चोपन रेलखंड पर श्रीबंशीधर नगर के चचेरिया गांव के पास हुई।

मृतकों में चचेरिया निवासी मंजूर खलीफा का 16 वर्षीय पुत्र लकी और शुडू साह का 16 वर्षीय पुत्र मुबारक साह शामिल हैं। दोनों किशोर मारूफ खलीफा के छोटे भाई अमीन खलीफा की शादी की पार्टी में शामिल होने गए थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा के बाद दोनों शव परिजनों को सौंप दिए। सोमवार की सुबह दोनों शवों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। दोनों बच्चे चेरिया गांव में शादी कार्यक्रम में शरीक होने पहुंचे थे।

गेम खेलने में वे इतने मशगूल थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि हटिया-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस आ रही है। दोनों मृतकों के परिजनों ने बताया कि रेलवे ट्रैक से 20 मीटर दक्षिण में मारूफ खलीफा के छोटे भाई अमीन खलीफा की शादी की पार्टी (रिसेप्शन) रविवार की रात रखी गई थी। इसमें भाग लेने के लिए लकी और मुबारक भी आए थे। रिसेप्शन के बाद दोनों रेलवे ट्रैक पर बैठ कर ऑनलाइन गेम खेलने लगे और ट्रेन की चपेट में आने से उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद रिसेप्शन समारोह में मातम छा गया। लोग रिसेप्शन छोड़ घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। इसके बाद पुलिस की सूचना दी गई।

दोनों किशोरों के घर की माली हालत ठीक नहीं
स्थानीय लोगों ने बताया कि मृत दोनों किशोरों के घर की माली हालत ठीक नहीं है। मुबारक के पिता शुडू साह पंक्चर की दुकान में काम कर घर का खर्चा चलाते हैं। खुद मुबारक भी इलेक्ट्रिक दुकान में काम करता था। वहीं लकी के पिता मंजूर खलीफा दर्जी हैं। कपड़े सीलकर जो आमदनी होती है, उसी से परिवार का खर्च चलता है। 10 दिन पहले ही मृतक का बड़ा भाई, जो मुंबई में रहकर पढ़ता है, दुर्घटना में घायल हो गया था। उसे देखने के लिए मंजूर खलीफा मुंबई गए हैं।