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झारखंड में तेजी से घट रही आदिवासियों की आबादी, निशिकांत दुबे ने उठाई जांच और NRC लागू करने की मांग

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बुधवार को लोकसभा में झारखंड में आदिवासी समुदाय की आबादी घटने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसके वजहों की जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने एनआरसी लागू करने की मांग की।

झारखंड में तेजी से घट रही आदिवासियों की आबादी, निशिकांत दुबे ने उठाई जांच और NRC लागू करने की मांग
Krishna Singhवार्ता,नई दिल्लीWed, 06 Dec 2023 04:28 PM
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लोकसभा में बुधवार को भाजपा के निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने झारखंड में आदिवासी समुदाय की आबादी घटने का मुद्दा उठाते हुए इसकी जांच और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने की मांग की। निशिकांत दुबे ने शून्य काल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि साल 1951 में राज्य में आदिवासी समुदाय की जनसंख्या 36 फीसदी थी, जो अब घटकर मात्र 24 प्रतिशत रह गई है।

निशिकांत दुबे ने कहा- ऐसे में जब सभी समुदायों की संख्या बढ़ रही है तो आदिवासी समुदाय की संख्या घट क्यों रही है। इसको सोचने और समझने की जरूरत है। यह स्थिति क्यों उत्पन्न हुई इसकी व्यापक जांच कराई जानी चाहिए। मैं यह मुद्दा कई बार उठा चुका हूं लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर अब तक कुछ ठोस नहीं किया गया है। 

निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने कहा कि पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद और कुछ अन्य जिले तथा बिहार के कुछ इलाकों में बंगलादेशी घुसपैठियों की घटनाएं बढ़ी हैं। इसी तरह झारखंड के कुछ क्षेत्रों में भी बंगलादेशी घुसपैठिए आ गए हैं। उन्होंने इसकी पूरी जांच और झारखंड को बंगलादेशी घुसपैठियों से बचाने की मांग की।

निशिकांत दुबे ने एनआरसी लागू करने की मांग करते हुए कहा कि अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की घुसपैठ में बढ़ोतरी के कारण झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में जनसांख्यिकी बदल रही है। मेरा राज्य झारखंड 1951 में आदिवासी बहुल राज्य के रूप में बिहार से अलग हो गया था। झारखंड में आदिवासियों की आबादी 36 प्रतिशत थी जो केवल 24 प्रतिशत रह गई है। झारखंड में आदिवासियों की आबादी कम हो गयी है।

दुबे ने कहा- पूरे देश में परिसीमन हो रहा है लेकिन झारखंड एक ऐसा राज्य है जहां 2008 में परिसीमन नहीं किया जा सका क्योंकि इससे लोकसभा में एक आदिवासी सीट और विधानसभा में तीन आदिवासी सीटें कम हो जाएंगी। यह हिंदू-मुस्लिम मुद्दा नहीं है। आज स्थिति यह है कि बांग्लादेशी घुसपैठिए आते हैं और आदिवासियों से शादी करते हैं। खासकर गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज, देवघर और जामताड़ा जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी बढ़ रही है।

भाजपा सांसद ने दावा किया कि पड़ोसी राज्य बिहार और पश्चिम बंगाल में भी ऐसी ही स्थिति देखी जा रही है। जब ममता बनर्जी सांसद थीं तो उन्होंने कहा था कि बांग्लादेशियों के कारण बंगाल की जनसांख्यिकी बदल रही है। मालदा, मुर्शिदाबाद और कालियाचक बांग्लादेशी घुसपैठियों से भरे हुए हैं। यही स्थिति बिहार के कटिहार, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और भागलपुर में भी है। बांग्लादेशियों के कारण जनसांख्यिकी बदल रही है। सरकार को एनआरसी लाना चाहिए और सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर भेजना चाहिए। 

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