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Hindi News झारखंड...तो लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे, BCI ने वकीलों के सर्टिफिकेट सत्यापन की मांगी रिपोर्ट

...तो लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे, BCI ने वकीलों के सर्टिफिकेट सत्यापन की मांगी रिपोर्ट

राज्य के वकीलों के सत्यापन की अद्यतन रिपोर्ट मांगी है। बीसीआई ने झारखंड बार काउंसिल को यह बताने को कहा है कि पिछले छह माह में कितने वकीलों ने प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया है। आइये जानते हैं।

...तो लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे, BCI ने वकीलों के सर्टिफिकेट सत्यापन की मांगी रिपोर्ट
Mohammad Azamलाइव हिन्दुस्तान,रांचीMon, 26 Feb 2024 10:01 PM
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने राज्य के वकीलों के सत्यापन की अद्यतन रिपोर्ट मांगी है। बीसीआई ने झारखंड बार काउंसिल को यह बताने को कहा है कि पिछले छह माह में कितने वकीलों ने प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया है और कितनों का मामला लंबित है। बता दें, बीसीआई ने झारखंड बार काउंसिल का चुनाव निलंबित करते हुए प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराने के बाद ही चुनाव कराने को कहा था। इसके लिए झारखंड बार काउंसिल ने आग्रह किया था। इसपर बीसीआई ने 25 अक्तूबर 2023 को इसके लिए 18 माह का समय दिया था। अब चार माह में हुई प्रगति का पूरा ब्योरा बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने मांगा है।

...तो लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की तय अ‌वधि में सत्यापन नहीं कराने वाले वकीलों के लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। इसके बाद वह वकालत नहीं कर पाएंगे। वकीलों से जुड़े किसी भी काम के भी हकदार नहीं होंगे। बता दें, राज्य में करीब 35 हजार वकील हैं। सत्यापन के लिए 16,500 वकीलों ने फॉर्म लिए हैं। इनमें दस हजार का सत्यापन हो गया है। जबकि 6500 वकीलों ने सत्यापन फॉर्म लेने के बाद अपने दस्तावेज झारखंड बार काउंसिल को नहीं दिए हैं। जबकि आठ हजार वकीलों ने सत्यापन का फॉर्म तक नहीं लिया है। करीब 42 प्रतिशत वकीलों ने सत्यापन नहीं कराया है। जबकि, 200 वकीलों ने विभिन्न कारणों से अपने लाइसेंस निलंबित कराए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया है निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल के वेरिफिकेशन नियम-2015 के तहत सभी बार काउंसिल को वकीलों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन को अनिवार्य बताया है। साथ ही इसे लागू करने का बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश दिया है। सभी वकीलों को अपने प्रमाणपत्रों के साथ एक फॉर्म भर कर देना होता है। फिर बार काउंसिल संबंधित विश्वविद्यालय और संस्थानों में प्रमाणपत्रों की जांच के लिए भेजती है। सत्यापन पूरा होने के बाद वकील को काउंसिल के सभी कार्यक्रमों में शामिल होने की छूट मिलती है। साथ ही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ और काउंसिल के चुनाव में भाग लेने की भी अनुमति मिलती है।

प्रमाणपत्र गुण और खराब हो जाने की दे रहे दलील
राज्य के कुछ वकील इस नियम का विरोध कर रहे हैं। वकीलों का कहना है कि वे 40 साल से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनका प्रमाणपत्र अब फटकर खराब हो गया है। वहीं, कुछ वकीलों का कहना है कि प्रमाणपत्र गुम हो गया है। इतने साल प्रैक्टिस करने के बाद फिर से प्रमाणपत्र की जांच कराने का निर्णय उचित नहीं है। जिनके पास प्रमाणपत्र नहीं हैं, उनके लिए संबंधित बार काउंसिल से नियमित प्रैक्टिस का प्रमाणपत्र ही मान्य होना चाहिए।

नियमित प्रैक्टिस करने का भी देना होगा प्रमाणपत्र
झारखंड के वकीलों को अपने नियमित प्रैक्टिस का भी प्रमाणपत्र देना होगा। वकीलों को अपने जिला बार संघों से नियमित प्रैक्टिस के प्रमाणपत्र के साथ कोर्ट के कुछ आदेश भी जमा करने होंगे, जिसमें उनके बहस करने का उल्लेख किया गया हो। जिस कोर्ट में वकील प्रैक्टिस कर रहे हैं, वहां बहस करने वाले मामलों का वकालतनामा और साल में तीन कोर्ट के आदेश की प्रति भी संलग्न करनी पड़ती है।

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