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18 सितम्बर, 2020|6:42|IST

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झारखंड के आठ हजार वकीलों के प्रैक्टिस पर लग सकता ग्रहण, जानें क्यों 

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश का अनुपाल नहीं करनेवाले हजारों अधिवक्ताओं की वकालत पर ग्रहण लग सकता है। बीसीआई ने प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2020 निर्धारित कर रखी है। राज्य के सात हजार 945 अधिवक्ता यदि समय रहते अपने प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं कराया तो उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। प्रैक्टिस पर भी रोक लग सकती है। बीसीआई ने देश के सभी राज्यों के बार काउंसिल को वकीलों का सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। झारखंड राज्य बार काउंसिल में लगभग 25 हजार वकील निबंधित हैं। और अभी तक सिर्फ 16493 अधिवक्ताओं ने ही अपने प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया है। जबकि लगभग आठ हजार अधिवक्ता ऐसे हैं जो बिना सत्यापन कराये वकालत कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के वेरिफिकेशन रूल्स 2015 के तहत देश के सभी राज्यों के बार काउंसिल को वकीलों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन को अनिवार्य बताया गया है। रांची जिला बार एसोसिएशन के महासचिव कुन्दन प्रकाशन, झारखण्ड उच्च न्यायालय एडवोकेट्स एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष धीरज कुमार ने समस्त अधिवक्ताओं के अपील की है कि 30 सितंबर से पूर्व सभी अपना वेरिफिकेशन फार्म जमा करें, जिससे भविष्य की परेशानियों से बचा जा सके।
 

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  • Web Title:The practice of eight thousand lawyers of Jharkhand can be eclipsed know why