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झारखंड में किराये पर घर चाहिए तो आईडी के साथ देना होगा गारंटर का नाम

वरीय संवाददाता ,रांची Published By: Ajay Singh
Fri, 22 Jan 2021 10:08 AM
झारखंड में किराये पर घर चाहिए तो आईडी के साथ देना होगा गारंटर का नाम

झारखंड के रांची में अब किराया पर मकान लेने के लिए किरायेदारों को आईडी कार्ड के साथ गारंटर का नाम भी देना होगा। अगर गारंटर का नाम नहीं देंगे, तो जहां काम करते हैं उस कंपनी का नाम या लोकल पहचान देनी होगी। रांची पुलिस की ओर से किराएदारों के सत्यापन के लिए जारी फार्म में इसका उल्लेख किया गया है। फार्म में गारंटर का नाम, पता और फोटो और पहचान अनिवार्य रूप से देना होगा।

 

रांची पुलिस ने सभी मकान मालिकों से गारंटर के बगैर मकान किराए पर नहीं देने को कहा है। इस फार्म को 26 जनवरी के बाद सभी थानों को उपलब्ध कराया जाएगा। फार्म मकान मालिक को दिया जाएगा। फार्म में मकान मालिक अपना तथा किराएदार को पूरा डिटेल अंकित करेंगे। साथ ही आधार कार्ड और पहचान पत्र की फोटो कॉपी भी फार्म के साथ लगानी होगी। पुलिस अफसरों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से अपराधी किराए के मकान में नहीं रह पाएंगे। साथ आपराधिक घटनाओं पर भी लगाम लगेगा।

 

घर के मुखिया की तस्वीर भी देनी होगी

रांची पुलिस की ओर से जारी फार्म में किराएदार के घर के मुखिया की तस्वीर भी चिपकानी होगी। इसके अलावा घर के सदस्यों के नाम और उम्र भी अंकित करना होगा। फार्म में कार्यस्थल की विवरणी भी देनी होगी।

 

बीट पुलिसिंग से किया जा रहा लिंक

रांची पुलिस की ओर से किराएदारों के सत्यापन योजना को बीट पुलिसिंग से लिंक किया जा रहा है। थाना में तैनात बीट पुलिस को उनका क्षेत्र बांटा जाएगा। जिन्हें जो क्षेत्र दिया जाएगा, वे उस इलाके में रह रहे किरायेदारों का वेरिफिकेशन करेंगे। फार्म भरवाकर उसे थाना में जमा करेंगे।

हर बीट पुलिस को दिया जाएगा नंबर

रांची पुलिस की ओर से हर बीट पुलिस को एक-एक मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया जाएगा। यह नंबर सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि लोग अपने क्षेत्र के बीट पुलिस को फार्म दे सकते हैं। यहां तक कि किसी तरह की समस्या होने पर भी, उसी नंबर पर सूचना भी दी जा सकती है।

 

किरायेदार बनकर रहते हैं अपराधी

रांची में आपराधिक घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। रांची पुलिस की जांच में यह बात सामने आयी है कि ज्यादातर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले अपराधी किराए का मकान लेकर रहते हैं और आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। यहां तक कि कई पीएलएफआई उग्रवादी को भी पुलिस ने किराए के मकान से ही दबोचा है।

पहले फेल हो चुकी है योजना

रांची पुलिस की ओर से वर्ष 2019 में भी किराएदारों का सत्यापन के लिए योजना शुरू की गई थी। सभी थानों को फार्म भी उपलब्ध कराया गया था। लेकिन किसी भी थाना में अबतक न तो आवेदन मकान मालिक ने लिया और न ही उसे थानों में जमा किया। यहां तक कि पुलिस की ओर से इसका प्रचार-प्रसार भी नहीं किया गया था। यही वजह थी कि योजना थानों तक ही सिमट कर रह गई।

दूसरे जगह से आकर लोग किराए का मकान लेकर रहते हैं। उसके बारे में न तो पुलिस को जानकारी होती है और न ही मकान मालिक को। वैसे ही लोग शहर में आपराधिक घटना को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। इसलिए किराएदारों का सत्यापन के लिए फार्म जारी किया गया है। इसमें किराएदारों की सारी जानकारी उपलब्ध रहेगी। आपराधिक घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा।

सौरभ, सिटी एसपी, रांची

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