ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News झारखंडकोई उम्मीद नहीं, JMM के एक्शन से फर्क नहीं पड़ता; पार्टी से निष्कासन के बाद क्या बोलीं सीता सोरेन

कोई उम्मीद नहीं, JMM के एक्शन से फर्क नहीं पड़ता; पार्टी से निष्कासन के बाद क्या बोलीं सीता सोरेन

सीता सोरेन के इस्तीफा देने के लगभग दो महीने बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने उन्हें पार्टी से 6 सालों के लिए निष्कासित कर दिया है। इस एक्शन पर सीता सोरेन ने कहा कि उन्हें कोई उम्मीद नहीं है।

कोई उम्मीद नहीं, JMM के एक्शन से फर्क नहीं पड़ता; पार्टी से निष्कासन के बाद क्या बोलीं सीता सोरेन
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,रांचीSat, 18 May 2024 08:49 AM
ऐप पर पढ़ें

झामुमो ने जामा विधायक सीता सोरेन और बारियो विधायक लोबिन हेंब्रम को शुक्रवार को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन द्वारा की गई यह कार्रवाई पार्टी विरोधी गतिविधि और दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ने के कारण की गई है। शिबू सोरेन की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गया है कि सीता ने प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और त्याग पत्र को स्वीकार करने का अनुरोध किया था। वहीं, दुमका से भाजपा के टिकट पर नामांकन भरा है। इस कारण उन्हें सभी पदों से मुक्त करते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्षों के लिए निष्कासित किया गया है। वहीं, लोबिन के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन करने को गठबंधन धर्म के विपरीत माना गया है।

झामुमो की कार्रवाई से कोई फर्क नहीं पड़ता: सीता

अपने निष्कासन पर सीता सोरेन ने कहा है कि झामुमो छोड़ चुकी हूं। इसलिए अब ऐसी कार्रवाई से कोई ठेस नहीं पहुंची है। जनता सब जानती है। जनता का आशीर्वाद मेरे साथ है। मुझे न कोई झटका लगा है और न ही झामुमो से कोई उम्मीद है। अब भाजपा से जुड़ी हूं और भाजपा के साथ ही आगे बढ़ते हुए जन सेवा करती रहूंगी।

इधर, सीता सोरेन ने शुक्रवार को गांडेय उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी दिलीप वर्मा एवं कोडरमा में अन्नपूर्णा देवी के पक्ष में मतदान की अपील की। कहा कि शिबू सोरेन जब तक स्वस्थ्य रहे, तब तक पार्टी और परिवार में उन्हें सम्मान मिला। उनकी याददाश्त कमजोर होते हेमंत ने कभी भी मुझे सोरेन परिवार की बड़ी बहू का दर्जा नहीं दिया।

निष्कासन का मुझे कोई अफसोस नहीं: लोबिन

लोबिन हेम्ब्रम ने कहा है कि उन्हें अपने निष्कासन का कोई अफसोस नहीं है। उन्होंने गुरुजी शिबू सोरेन के जल, जंगल व जमीन की लड़ाई को सिर्फ आगे बढ़ाने का काम किया है। इसमें साथ देने के बजाए झामुमो ने उन्हें पार्टी से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान राजमहल सीट से चुनाव जीतने का है। वे निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। पहले भी 1995 में एक बार जब झामुमो ने सिटिंग एमएलए रहने के बावजूद बेवजह उनका टिकट बोरियो सीट से काट दिया था, उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और शानदार जीत हासिल की। झामुमो के अधिकृत प्रत्याशी चौथे नम्बर पर चले गए थे। कुल मिलाकर उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ना भाता है।