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जज्बे को सलाम: एक या दो नहीं, 1400 अनाथ बच्चों की माई हैं सिंधुताई

ये हैं अनाथों की मां सिंधुताई  ( फोटो: गूगल)

एक महिला के कितने बच्चे हो सकते हैं? आप कहेंगे एक, दो, चार या 10। लेकिन, एक माई है जिसके 1400 बच्चे हैं। और इनकी देखभाल करतीं हैं 70 वर्ष की सिंधुताई सपकाल। इन्हें पालने के लिए पहले तो भीख मांगा, लेकिन अब स्पीच देकर पैसे जमा करती हैं। वह उन्हें पढ़ाती हैं, उनकी शादी कराती हैं। बच्चों में भेदभाव न हो, इसलिए अपनी बेटी किसी और को दे दी। आज उनकी बेटी बड़ी हो चुकी है और वह भी एक अनाथालय चलाती है। सिंधुताई का जन्म 14 नवम्बर 1947 को महाराष्ट्र के वर्धा जिले के पिंपरी मेघे गांव में हुआ था। 

10 वर्ष की उम्र में हो गई शादी : 
‘रोटरी क्लब ऑफ जमशेदपुर’ की ओर से गुरुवार को बेल्डीह क्लब में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आईं सिंधुताई सपकाल ने बताया कि उनकी शादी तब हुई, जब वह सिर्फ 10 साल की थीं। पति की उम्र 35 वर्ष थी, जो उन्हें हमेशा गालियां देता और मारता था। उन्हें तीन बेटे हुए और चौथी बेटी। पति को संतान के रूप में बेटी नहीं चाहिए थी, इसलिए जब वह गर्भवती थीं, तो सिंधुताई को छोड़ दिया। जिस परिस्थिति में वह थीं कोई भी हिम्मत हार जाता, लेकिन सिंधुताई हर मुसीबत के साथ और मजबूत होती गईं। आज वह 1400 बच्चों की मां हैं। 

जिनका कोई नहीं, उनके लिए :
सिंधुताई बताती हैं कि शायद उस वक्त मुझे घर से नहीं निकाला जाता तो आज इतने जरूरतमंद अनाथ बच्चों की मां नहीं होतीं। सिंधुताई ने इन बच्चों को उस वक्त अपनाया जब उनके पास खुद का कोई घर नहीं था। 70 साल की ये मां आज दुनियाभर के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। वह कहती हैं कि मैं उन सबके लिए हूं, जिनका कोई नहीं है। उन्होंने बताया कि वह एक ऐसी संतान थीं, जिसकी किसी को जरूरत नहीं थी।

खुद अपनी नाल काटीं :
घर से निकाले जाने के बाद सिंधुताई को गोशाला में अपनी बच्ची को जन्म देना पड़ा। वह बताती हैं कि उन्होंने अपने हाथ से अपनी नाल काटी। बाद में बेटी के साथ रेलवे-प्लेटफॉर्म पर भीख मांगकर गुजर-बसर करने लगीं। उन्होंने उन सभी बच्चों को गोद ले लिया, जिनका कोई नहीं था। जिसके बाद धीरे-धीरे इन बच्चों के लिए भी भीख मांगना शुरू कर दीं।

पति को माफ किया :
कुछ वक्त बाद उनका पति उनके पास लौट आया। उन्होंने उसे माफ कर एक बेटे के तौर पर स्वीकार किया और पांच साल तक उसकी देखभाल की। आज सिंधुताई के परिवार में उनके 250 दामाद हैं। 45 से ज्यादा बहुएं और एक हजार से अधिक पोते-पोतियां हैं। अब वह सब भी उनकी इस काम में मदद करते हैं। सिंधुताई बताती हैं कि तब मैंने उन्हे पाला आज ये बच्चे मेरी देखभाल करते हैं। आज भी वह किसी से मदद नहीं लेतीं बल्कि खुद स्पीच देकर पैसे जमा करने की कोशिश करती हैं। उनके इस काम के लिए उन्हें 500 से अधिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उनके नाम पर 6 संस्थाएं चलती हैं, जो अनाथ बच्चों की मदद करती है।
 

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  • Web Title:Sindhutai is the mother of 1400 orphans