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सरहदें नहीं बहेलिए रोक रहे विदेशी पंक्षियों का रास्ता 

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एक तरफ जहां विदेशी चिड़ियों और लोकल माइग्रेट्री बर्ड को बचाने के लिए सरकार और गैर सरकारी संगठनों की ओर से कवायद चल रही है, वहीं तिलैया डैम में बहेलिये जाल में फंसा कर बेच रहे हैं। तिलैया डैम में सर्दी शुरू होते ही देश और विदेश के कई पक्षी पहुंचे हैं। इनमें यूनियन फोर कंजरवेशन ऑफ नेचर (आइयूसीएन) और राज्य सरकार की ओर से जारी सूची के मुताबिक अति असुरक्षित और खतरे में घोषित पक्षी भी हैं। पर दुर्भाग्य यह है कि उन्हें भी धड़ल्ले निशाना बनाया जा रहा है। 
 

क्या हो रहा है
बहेलिये डैम के निकट आकाश में बड़ा जाल लगा दिए हैं। शाम के समय पक्षियों को खदेड़ा जाता है। जैसे ही वे एक ओर उड़ते हैं जाल में उलझ जाते हैं, क्योंकि रात में उन्हें जाल नहीं दिखता है। रोज सैकड़ों परिंदे फंस रहे हैं। जाल में फंसने वाले पक्षियों को काफी दाम पर बेचा जाता है। लोग इनका मांस खाने के लिए शौक से खरीदते हैं। 
 

कौन कौन प्रजाति के पक्षी पहुंचे हैं
तिलैया डैम में पहुंचने वाले पक्षियों में ब्लैक हेडेड आइविस, वूलीनेक स्टॉर्फ, ओरिएंटल डाटर, वाइट रम्प वल्चर और बारहेडेड गीज शामिल हैं। इनमें से कुछ असुरक्षित, तो कई अति असुरक्षित कुछ नियरली थ्रेटेंड हैं। चिंता की बात यह है कि हजारों किलोमीटर दूरी से आनेवाले वारहेडेड गीज को भी निशाना बनाया जा रहा है। तीन साल पूर्व वन विभाग की ओर से इस तरह जाल लगाने पर कार्रवाई की गयी थी। 

पक्षी प्रेमी दुखी 
पक्षी प्रेमी और बर्ड वाचर इंद्रजीत सामंता ने कहा कि काफी दुख होता है पक्षियों की इस स्थिति को देखकर, विदेशी और देशी पक्षियों को इस तरह जाल में फंसाकर बेचना गैरकानूनी है। विभाग को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।

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  • Web Title:Road to foreign birds not stopping borders