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झारखंड: इंटर में एक लाख छात्रों के रजिस्ट्रेशन पर संकट, कॉलेजों की करतूत का छात्रों को खामियाजा, ये है मामला

हिन्दुस्तान ब्यूरो,रांचीSudhir Kumar
Wed, 27 Oct 2021 07:55 AM
झारखंड: इंटर में एक लाख छात्रों के रजिस्ट्रेशन पर संकट, कॉलेजों की करतूत का छात्रों को खामियाजा, ये है मामला

झारखंड के इंटर कॉलेजों में निर्धारित सीट से करीब एक लाख ज्यादा छात्र-छात्राओं का नामांकन ले लिया गया है। एक संस्थान में दो से तीन ज्यादा सेक्शन में एडमिशन ले लिया गया है। अभी भी हजारों छात्र-छात्राएं कतार में हैं। अब संकट यह है कि झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने अगर संस्थानों की सीटों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की तो संबंधित छात्र-छात्राओं का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा और न ही 2023 में होने वाली इंटरमीडिएट की परीक्षा में वे शामिल हो सकेंगे। इसको लेकर कॉलेज का प्रबंधन सशंकित है। कॉलेजों ने सीटों में बढ़ोतरी के लिए प्रस्ताव जैक को भेज दिया है।

एडमिशन के लिए मारामारी

राज्य के इंटरमीडिएट कॉलेजों में अलग-अलग निर्धारित सीटें हैं। राज्य के प्रस्वीकृति प्राप्त 170 इंटर कॉलेजों में आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स संकाय के लिए एक सेक्शन में 384-384 सीटें निर्धारित हैं। इनमें आर्ट्स और साइंस विषय में ज्यादा मारामारी है। अधिकांश संस्थानों में अतिरिक्त दो से तीन सेक्शन में नामांकन ले लिया गया है। वहीं स्थापना अनुमति प्राप्त करीब 100 इंटर कॉलेजों में तीनों संकाय में 128-128 छात्र-छात्राओं के नामांकन के लिए सीटें निर्धारित हैं। जैक के दो साल पूर्व दी गई अनुमति पर इन संस्थानों में आर्ट्स में 256 सीटों पर नामांकन लिया गया है। 100 एफिलिएटिड डिग्री कॉलेज और 67 अंगीभूत कॉलेजों के तीनों संकायों में अलग-अलग सेक्शन में 512-512 सीटें निर्धारित हैं। बावजूद इसके इन संस्थानों में भी निर्धारित सीट से ज्यादा नामांकन लिया गया है।

आवंटित सीटों पर नामांकन लेने का था निर्देश

राज्य के इंटरमीडिएट संस्थानों को आवंटित सीटों पर ही नामांकन लेने का निर्देश दिया गया था। जैक ने इस संबंध में पत्र भी जारी किया था। इसमें स्पष्ट था कि 2020-22 के लिए जो सीट निर्धारित थी उसी निर्धारित सीट पर 2021-23 सत्र में इंटरमीडिएट में नामांकन होगा।

संस्थानों की जांच कर बढ़ाई जाती हैं सीटें

निर्धारित सीटों से ज्यादा सीटों पर नामांकन लेने के लिए संस्थानों की ओर से आवेदन लिए जाते थे, जिसकी जैक की ओर से जांच की जाती है। संस्थानों में सीटें बढ़ने की स्थिति में आधारभूत संरचना है या नहीं, उस अनुपात में शिक्षक, क्लासरूम, बेंच डेस्क, पुस्तकालय, प्रयोगशाला है या नहीं यह देखा जाता है। इसके लिए जैक के अध्यक्ष की ओर से संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की जाती है। यह कमेटी संबंधित कॉलेजों में जाती है और पूरे मानकों की जांच कर अपनी रिपोर्ट जैक को देती है। वर्तमान में जैक में ना तो अध्यक्ष हैं ना ही कोई उपाध्यक्ष। दोनों ही पद 15 सितंबर से खाली हैं। ऐसे में सीट बढ़ोतरी किए जाने का मामला लंबित है। अध्यक्ष के नहीं रहने पर स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के हस्तक्षेप के बाद ही संस्थानों की जांच जैक की ओर से कराई जा सकती है।

मैट्रिक का बेहतर रिजल्ट बना कारण

कोरोना संक्रमण और 2021 के मैट्रिक परिणाम की वजह से इन संस्थानों में नामांकन को लेकर इतनी होड़ है। मैट्रिक का रिजल्ट 95 ़फीसदी से भी ज्यादा रहा है। जो बच्चे राज्य के प्रमुख कॉलेजों में पढ़ने जाते थे या फिर राज्य के बाहर जाते थे, उनकी संख्या इस साल कोरोना की वजह से कम हुई है। सभी अपने नजदीक के कॉलेजों में नामांकन कराना चाहते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा दबाव इंटरमीडिएट कॉलेजों पर है।

स्थीनीय लोगों का दबाव

छात्र-छात्राओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों का काफी दबाव है कि जब उनके क्षेत्र में कॉलेज है तो बच्चे दूसरे जगह क्यों पढ़ने जाएंगे। इसी वजह से चल रहे सेक्शन से अतिरिक्त दो से तीन सेक्शन में नामांकन ले लिया गया है। अब इन सेक्शन की मान्यता के लिए जैक में प्रस्ताव भी भेजा गया है

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