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10 लाख में रेट फाइनल; फर्जी छात्रों से ऐसे दिलाते थे NEET की परीक्षा, रहने-खाने का इंतजाम भी

फर्जी अभ्यर्थियों ने पुलिस को यह भी बताया कि नीट परीक्षा में शामिल होने के लिए वे चार मई की सुबह रांची पहुंचे थे। उनके रहने और खाने-पीने की सारी व्यवस्था गिरोह के लोगों ने ही किया था।

10 लाख में रेट फाइनल; फर्जी छात्रों से ऐसे दिलाते थे NEET की परीक्षा, रहने-खाने का इंतजाम भी
Devesh Mishraहिन्दुस्तान,रांचीTue, 07 May 2024 07:34 AM
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नीट (यूजी) की परीक्षा के दौरान रांची के पांच केंद्रों से रविवार को गिरफ्तार छह फर्जी परीक्षार्थियों को पुलिस ने सोमवार को जेल भेज दिया। इससे पहले पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया है कि 10-10 लाख रुपए लेकर वे लोग दूसरे की जगह परीक्षा देने बैठे थे। इसके लिए परीक्षा दिलाने वाले गिरोह ने उनसे संपर्क किया था। एडवांस के तौर पर प्रति परीक्षार्थी 50 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक दिए गए। इधर, पांच स्कूलों में बनाए गए केंद्र के प्राचार्यों ने अपने-अपने इलाके के थाने में फर्जीवाड़े की प्राथमिकी दर्ज करा दी है।

रहने-खाने का इंतजाम भी
फर्जी अभ्यर्थियों ने पुलिस को यह भी बताया कि नीट परीक्षा में शामिल होने के लिए वे चार मई की सुबह रांची पहुंचे थे। उनके रहने और खाने-पीने की सारी व्यवस्था गिरोह के लोगों ने ही किया था। गिरोह ने उनसे कहा था कि परीक्षा देने के बाद उन सबको बाकी राशि दे दी जाएगी।

सभी निकले मेडिकल के छात्र
आरोपी बिहार, ओडिशा के मेडिकल छात्र पुलिस को पूछताछ में पता चला कि पकड़े गए सभी फर्जी परीक्षार्थी मेडिकल के छात्र हैं। इनमें आशीष कुमार पीएमसीएच पटना में सेकंड ईयर, जैद अहमद एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर के सेकेंड ईयर, सुमित कुमार और सोनू कुमार सिंह मधुबनी मेडिकल कॉलेज, विकास व जीतेंद्र सैनी ओडिशा के बेहरमपुर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। विकास और जीतेंद्र दोनों राजस्थान के रहने वाले हैं।

गरीब परिवार के टॉपरों को चुनता है गिरोह
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह का नेटवर्क बिहार, ओडिशा और राजस्थान से जुड़ा है। देश की महत्वपूर्ण परीक्षाओं में फर्जी परीक्षार्थियों को शामिल कराने वाला गिरोह पूरी योजना से काम करता है। उसके पास नीट में टॉपर रहे छात्रों की सूची रहती है। उनके निशाने पर खासकर वैसे मेडिकल छात्र होते हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के होते हैं। ऐसे मेडिकल छात्रों से गिरोह संपर्क करता है और दूसरे के बदले परीक्षा देने के लिए बड़ी रकम की पेशकश करता है।

परीक्षा देने के लिए लालच व दबाव दोनों थे
फर्जी परीक्षार्थियों ने पुलिस को बताया कि दूसरे की जगह परीक्षा देने के लिए उन पर लालच के साथ दबाव भी दिया गया। बरियातू पुलिस द्वारा गिरफ्तार आशीष कुमार ने बताया कि वह सीवान के रहने वाले प्रियांशु की जगह नीट की परीक्षा दे रहा था। प्रियांशु का भाई सुधांशु उसके साथ पीएमसीएच में पढ़ता है। उसी ने परीक्षा देने के लिए फोर्स किया था। साथ ही 10 लाख रुपए भी देने की बात कही थी। कैंब्रियन स्कूल से गिरफ्तार जैद अहमद ने कहा कि वह मुजफ्फरपुर एसकेएमसीएच का छात्र है। बंगाल निवासी रुद्रनील की जगह परीक्षा देने आया था। बेहरामपुर मेडिकल कॉलेज के छात्र विकास और जीतेंद्र ने बताया कि वह बेहरामपुर निवासी अमीष पाणिग्रही और विवेकानंद महापात्रा की जगह डीपीएस में परीक्षा देने आए थे। उन्हें भी 10-10 लाख रुपए देने का आश्वासन मिला था।

डाटा व दस्तावेजों का मिलान न होने पर पकड़ाए
देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के रविवार को नीट परीक्षा ली गई थी। रांची के पांच केंद्रों पर परीक्षा शुरू होने से पहले परीक्षार्थियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति बनाई जा रही थी। इसमें पांच का डाटा मैच नहीं हुआ। दस्तावेजों का भी मिलान नहीं होने पर सभी को पकड़ लिया गया। एनटीए से मिली जानकारी के बाद जब अभ्यर्थियों की सेंटरों में जांच हुई तो डाटा मैच नहीं हुआ। अभ्यर्थियों के आधार कार्ड भी गलत पाए गए। इसके बाद मामले की जानकारी थाने में दी गई। डीएवी धुर्वा, डीपीएस, सरला-बिरला, कैम्ब्रियन स्कूल कांके रोड और डीएवी बरियातू के प्राचार्य ने विभिन्न थानों में प्राथमिकी दर्ज करायी है।