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Hindi News झारखंडनेताओं तक पहुंचा करोड़ों, IAS अधिकारियों पर भी शक; नोटों के पहाड़ पर ईडी ने कोर्ट को क्या बताया

नेताओं तक पहुंचा करोड़ों, IAS अधिकारियों पर भी शक; नोटों के पहाड़ पर ईडी ने कोर्ट को क्या बताया

ईडी ने कोर्ट को बताया है कि पैसों की बरामदगी के बाद इसके स्रोत की जांच ईडी कर रही है। लेकिन, जांच में संजीव और जहांगीर ने एजेंसी को सहयोग नहीं किया। इसी वजह से दोनों को तत्काल गिरफ्तार किया गया।

नेताओं तक पहुंचा करोड़ों, IAS अधिकारियों पर भी शक; नोटों के पहाड़ पर ईडी ने कोर्ट को क्या बताया
Devesh Mishraहिन्दुस्तान,रांचीWed, 08 May 2024 07:52 AM
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झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग में भ्रष्टाचार और ठेकों से कमीशन के नाम पर उगाही का पैसा संजीव लाल (निजी सचिव) तक पहुंचता था। पैसों की उगाही के लिए वह विभाग के इंजीनियरों व कुछ प्राइवेट लोगों का इस्तेमाल किया करता था। ईडी ने कोर्ट को बताया है कि झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के निचले अधिकारियों से लेकर उच्च पदस्थ पदाधिकारियों का नेक्सस पूरे करप्शन में शामिल है। अफसर-नेताओं तक करोड़ों रुपए पहुंचा। इन सभी को कैश में काफी बड़ी मात्रा में पैसे पहुंचाए जाने की बात शुरुआती जांच में आयी है।

संजीव और जहांगीर ने शुरू में नहीं किया सहयोग
ईडी ने कोर्ट को बताया है कि पैसों की बरामदगी के बाद इसके स्रोत की जांच ईडी कर रही है। लेकिन, जांच में संजीव और जहांगीर ने एजेंसी को सहयोग नहीं किया। इसी वजह से दोनों को तत्काल गिरफ्तार किया गया। ईडी को अंदेशा है कि उगाही के पैसों की चल व अचल संपत्ति में निवेश किया गया है। साथ ही इससे कई लोग लाभांवित भी हुए हैं। सरकार के उच्च पदस्थ अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जा सके, इसके लिए दोनों आरोपियों के रिमांड की मांग एजेंसी ने की थी।

राजनेताओं और अफसरों का कमीशन 1.5 प्रतिशत
ईडी ने जांच में पाया है कि विभागीय ठेकों में कुल 3.2 प्रतिशत की उगाही होती थी। इसमें 1.5 प्रतिशत का कमीशन कट मनी के तौर पर बड़े राजनेता और विभाग के बड़े अधिकारियों तक जाती थी। जांच में यह बात सामने आयी है कि संजीव लाल की देखरेख में कमीशन का कलेक्शन प्रभावशाली लोगों तक जाता था। टेंडर मैनेज करने और कमीशन की उगाही तक में इंजीनियरों के सिंडिकेट के साथ मिलकर रकम की उगाही होती थी। इसके बाद तय परसेंटेज सरकार के उच्च पदस्थ लोगों तक पहुंचायी जाती थी। जांच में कुछ आईएएस अधिकारियों व नेताओं की भूमिका बड़े संदिग्ध के तौर पर उभरी है।

पैसे उगाही को असिस्टेंट इंजीनियरों की थी टीम
ईडी ने जांच में आए तथ्यों की जानकारी रिमांड पीटिशन के जरिए कोर्ट को दी है। इसमें ईडी ने बताया है कि फरवरी 2023 में मनी लाउंड्रिंग के आरोप में वीरेंद्र राम की गिरफ्तारी के बाद पहली बार मंत्री आलमगीर आलम के ओएसडी संजीव लाल का नाम सामने आया था। वीरेंद्र राम ने बताया था कि विभाग के कमीशन की उगाही के करोड़ों रुपये उसने सितंबर 2022 में संजीव लाल को हैंडओवर किए थे। संजीव लाल ने पैसों की उगाही के लिए असिस्टेंट इंजीनियरों की टीम बनायी थी। अब यह टीम भी ईडी के रडार पर है।

जहांगीर ने कबूला- संजीव के नेक्सस का हिस्सा
ईडी ने कोर्ट को बताया है कि पूछताछ के दौरान जहांगीर ने कबूल किया है कि वह मंत्री के ओएसडी संजीव लाल के नेक्सस का हिस्सा है। इसी वजह से संजीव ने उसके नाम पर दो गाड़ियों की खरीद की थी, जिसका इस्तेमाल भी संजीव खुद किया करते थे। ईडी ने कोर्ट को बताया है कि 6 मई को छापेमारी के दौरान जहांगीर आलम के यहां से मिले 32.30 करोड़, मुन्ना के यहां से मिले 2.93 करोड़ और संजीव लाल के आवास से मिले 10.05 लाख रुपये कमीशन के ही हैं।