घर नहीं आ सका बेटे का शव, कपड़े दफनाकर पूरी की अंतिम संस्कार की रस्म

Shivendra Singh हिन्दुस्तान प्रतिनिधि, सिमडेगा |
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इस मां-बाप की बेबसी देखिए। गुजारे के लिए चार पैसे कमाने परदेस गए जवान बेटे को बीमारी खा गई। लॉकडाउन के कारण परदेस से बेटे का शव भी गांव नहीं आ सका। गम से टूटे मां-बाप ने मोबाइल पर ही अंतिम दर्शन...

घर नहीं आ सका बेटे का शव, कपड़े दफनाकर पूरी की अंतिम संस्कार की रस्म

इस मां-बाप की बेबसी देखिए। गुजारे के लिए चार पैसे कमाने परदेस गए जवान बेटे को बीमारी खा गई। लॉकडाउन के कारण परदेस से बेटे का शव भी गांव नहीं आ सका।

गम से टूटे मां-बाप ने मोबाइल पर ही अंतिम दर्शन किए और कब्र में उसके कपड़े दफनाकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की। जलडेगा प्रखंड के कोनमेरला बरकीटांगर निवासी अर्जुन बड़ाईक कुछ साल पहले कमाने के लिए गोवा गया था। करीब एक सप्ताह पहले अर्जुन की तबीयत खराब हो गई। उसे पीलिया ने जकड़ लिया।

बीमारी के कारण अर्जुन गोवा से सिमडेगा अपने गांव लौटना चाहता था, लेकिन लॉकडाउन के कारण यह संभव नहीं हो सका। इस बीच उसकी हालत खराब होने पर दोस्तों ने उसे गोवा के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जहां बीमारी से लड़ते हुए आखिर अर्जुन ने दम तोड़ दिया। बेटे की मौत की सूचना घरवालों को हुई तो उसके अंतिम दर्शन के लिए परिजन तड़प उठे। लेकिन लॉकडाउन में ना तो परिजन गोवा जा सकते थे और ना ही अर्जुन का शव गोवा से घर लाया जा सकता था। लिहाजा सोमवार को अर्जुन के दोस्तों ने प्रशासन की मौजूदगी में वहीं उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

अंतिम संस्कार की पूरी विधि निभाई
माता-पिता ने उसके अंतिम संस्कार की रस्म भी पूरी की। परिजनों ने अर्जुन के नाम पर कब्र तैयार की। इसके बाद घर मे पड़े अर्जुन के कपड़े कब्र में दफनाकर अंतिम संस्कार किया गया।

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शिवेंद्र सिंह 'लाइव हिन्दुस्तान' में कॉपी एडिटर की भूमिका में हैं।  

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