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झारखंड: कोर्ट मैनेजर की बहाली का रास्ता साफ, जानिए- क्या है योग्यता, वेतन, जिम्मेवारी और सेवा शर्त

प्रमुख संवाददाता,रांचीSudhir Kumar
Mon, 29 Nov 2021 07:16 AM
झारखंड: कोर्ट मैनेजर की बहाली का रास्ता साफ, जानिए- क्या है योग्यता, वेतन, जिम्मेवारी और सेवा शर्त

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राज्य की अदालतों में अब एमबीए की डिग्री रखने वाले कोर्ट मैनेजर नियुक्त किए जाएंगे। ये कोर्ट मैनेजर मामलों के त्वरित निष्पादन के साथ साथ ई गवर्नेंस को तेजी से बढ़ाएंगे। प्रशासकीय कार्य में भी प्रधान न्यायाधीश, सत्र न्यायाधीश और न्यायायुक्तों को सहयोग करेंगे। हालांकि नीतिगत मामलों में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के निर्देश के बाद झारखंड में सरकार ने इनकी नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। इसके लिए झारखंड सरकार ने राज्य सिविल कोर्ट मैनेजर नियुक्ति सेवा शर्त अपील नियमावली 2020 को मंजूरी प्रदान कर दी है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद विधि विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।

कोर्ट मैनेजरों की नियुक्ति लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर की जाएगी। झारखंड हाइकोर्ट इनकी नियुक्ति करेगा। वैसे कर्मी जो सिविल कोर्ट में कार्यरत हैं और उनके पास बिजनेस मैनेजमेंट की डिग्री है, तो उन्हें प्राथमिकता दी जायेगी।

ये होगा अनुभव और वेतन

नियुक्ति के लिए एमबीए पास और पांच साल की नौकरी का अनुभव,आईटी आदि संस्थानों में अनुभव का होना जरूरी होगा। इनको सातवें वेतनमान के तहत लेबल दो 67000 हजार का वेतनमान दिया जायेगा। छठा वेतनमान में 15600 - 39100 ग्रेड पे 6600 होगा। न्यूनतम उम्र सीमा 25 साल निर्धारित की गयी है। अधिकतम उम्र सीमा आरक्षण कैटेगरी में कार्मिक विभाग के द्वारा तय नियम के अनुसार होगी।

ये होगा काम

अदालतों में बहाल होने वाले कोर्ट मैनेजरों के जिम्मे टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट,डाटा मैनेजमेंट, ऑटोमेटेड रिकार्डस,इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ कोर्ट रजिस्ट्रर, रसदी, सेंट्रालाइज फाइलिंग, नजारत सेक्शन,कॉपिंग सेक्शन,मालखाना सहित कई विभागों के साथ समन्वय आदि का काम होगा।

एमबीए की डिग्री रखने वाले युवक होंगे बहाल

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालयों के कामकाज की रफ्तार को लेकर चिंता जतायी थी। सभी राज्यों को अदालती कामकाज में तेजी लाने के मकसद ये यह निर्देश दिया था कि न्यायालयों में प्रशिक्षित कोर्ट मैनेजरों की नियुक्ति की जाए। सात-आठ साल पहले भी यह बात उठी थी पर झारखंड सहित कई राज्यों ने इस पर पहल नहीं की थी। अब नियमावली बन जाने के बाद कोर्ट में कोर्ट ेएमबीए की डिग्री रखने वाले मैनेजरों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। इनकी नियुक्त होने के बाद कामकाज में भी तेजी आयेगी।

दो साल प्रोबेशन

दो साल के प्रोबेशन के बाद कोर्ट मैनेजरों को नियमित किया जाएगा। रेगुलर प्रमोशन के लिए पोस्ट न होने से यह सिंगल कैडर पोस्ट कहलायेगा। एमएसीपी लाभ सरकार के संकल्प के अनुसार मिलेगा।

तबादला भी संभव

कोर्ट मैनेजरों के नियमितीकरण की तिथि से वरीयता का निर्धारण होगा। समय-समय पर तबादला भी होगा। जारी नियमावली के अनुसार इसमें दंड का भी प्रावधान किया गया है,जिसके विरूद्ध अपील भी की जा सकती है।

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