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Hindustan Special: झारखंड में एक ऐसा हाट जहां बिकते हैं सिर्फ आदिवासियों के बनाए सामान, हर माह लगतीं हैं आकर्षक दुकानें

टाटा स्टील फाउंडेशन की इस पहल का उद्देश्य देशभर की आदिवासी कला और संस्कृति को बढ़ावा देना है। एक वर्ष के दौरान जोहार हाट ने 15 जनजातियों के 120 से अधिक प्रतिभागियों को शामिल किया है

Hindustan Special: झारखंड में एक ऐसा हाट जहां बिकते हैं सिर्फ आदिवासियों के बनाए सामान, हर माह लगतीं हैं आकर्षक दुकानें
Swati Kumariगुलाब सिंह,जमशेदपुरTue, 13 Feb 2024 10:53 PM
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झारखंड के इस शहर में एक ऐसा भी हाट लगता है जहां सिर्फ आदिवासियों की ओर से निर्मित उत्पाद ही बिकते हैं। जनजातीय कला के साथ खानपान को भी इस बढ़ावा दिया जाता है। हर महीने में सात दिन लगने वाले इस हाट का यहां के लोगों का बेसब्री से इंतजार रहता है। जमशेदपुर के कदमा के प्रकृति के इस हाट का नाम जोहार हाट दिया गया है। इस अनूठी परंपरा का जिम्मा उठाया है टाटा स्टील फाउंडेशन ने। जोहार हाट अपनी पहली वर्षगांठ मना रहा है। हर माह 14 से 20 तारीख तक लगने वाले  इस अंतरप्रांतीय आदिवासी हाट ने अब जमशेदपुर में अपनी अलग पहचान बना ली है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका नियमित आयोजन है। और उससे भी महत्वपूर्ण इससे लाभान्वित होने वाले आदिवासी लोग हैं।

आदिवासी कला और संस्कृति को बढ़ावा देना उद्देश्य:
टाटा स्टील फाउंडेशन की इस पहल का उद्देश्य देशभर की आदिवासी कला और संस्कृति को बढ़ावा देना है। एक वर्ष के दौरान जोहार हाट ने 15 जनजातियों के 120 से अधिक प्रतिभागियों को शामिल किया है, इनमें 6000 से अधिक लोग शामिल हुए हैं। जोहार हाट की सालगिरह के जश्न में कलात्मकता, उपचार परंपराओं और व्यंजन परोसने वाली आदिवासी दुकानें शामिल होती हैं। इसमें आदिवासी कारीगरों, चिकित्सकों और घरेलू रसोइयों के साथ बातचीत की पेशकश भी की जाती है। आदिवासी पेंटिंग इसका एक मुख्य आकर्षण है। इस दौरान यहां आदिवासी संगीत, फिल्म स्क्रीनिंग, आभूषण बनाना और आदिवासी व्यंजन तैयार करने के बारे में बताया और सिखाया जाता है।

देशभर के आदिवासी होते हैं शामिल:
इसमें झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, नागालैंड और लद्दाख के प्रतिभागी भी शामिल होते हैं और विविध जनजातीय कलाएं प्रस्तुत करते हैं। वे अपने यहां प्रचलित खाद्य पदार्थ यहां बनाकर दिखाते और खिलाते हैं। अब शहर वासियों में भी इसके प्रति आकर्षण जागा है। खास तौर से टाटा स्टील में कार्यरत कर्मियों के परिवार यहां आकर वक्त बिताते और खरीदारी करते हैं। साथ ही आदिवासियों के अनोखे व्यंजनों का आनंद उठातीं हैं।

आयोजन को लेकर टाटा स्टील के एमडी उत्साहित:
प्रबंधन संस्थान एक्सएलआरआई ने भी इसमें भागीदारी निभाई है। जोहार हाट को बढ़ाने को लेकर टाटा स्टील के सीइओ और एमडी एमडी टीवी नरेंद्रन भी खासे उत्साहित हैं। हाल में उन्होंने कहा था कि टाटा स्टील फाउंडेशन जोहार हाट जैसी पहल के माध्यम से आदिवासी संस्कृति को संरक्षित और बढ़ावा दे रहा है। उनके अनुसार आदिवासी समुदायों के समर्थन में फाउंडेशन का प्रयास उनकी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में मदद करता है।

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