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भाइयों की दीर्घायु के लिए लोधी क्षत्रिय महिलाएं करेंगी भोजली

rakhi

शहर का लोधी क्षत्रिय समाज राखी-भोजली पर्व को लेकर उत्साह में है। छत्तीसगढ़ी संस्कृति की महिला प्रधान पर्व भोजली पर गुरुवार की शाम में सोनारी और गाढ़ाबासा में शोभायात्रा निकलेगी। 

नई दुल्हनों में है उत्साह
नवविवाहिता कन्याओं ने रक्षाबंधन से सप्ताहभर पहले भोजली को बोया है। इसे नई दुल्हन सिर पर रखकर नदी तट पर विसर्जन करने जाएंगी। भाई द्वारा उस भोजली को बहन के सिर से उतारा जाएगा। नवविवाहितों में काफी उत्साह है। पहली भोजली को लेकर मायका पहुंचीं नई नवेली दुल्हनों ने सोनारी और गाढ़ाबासा क्षेत्र में भोजली की रोपनी की। पूर्णिमा पर 15 अगस्त को नवविवहित और सुहागन महिलाएं सोनारी बालीचेला स्कूल के समीप से शोभा यात्रा निकालेगी जो दोमुहानी में विसर्जित होगी।

भोजली है क्या
छत्तीसगढ़ी समाज के जानकार जगन्नाथ साहू बताते हैं कि भू-जली शब्द का अपभ्रंस लिए भोजली में सावन में प्रकृति पूजा स्वरूप महिलाएं मन्नत करती हैं। वर्ष 1182 में आल्हा उदल के समय महुबाई राजकुमारी चंद्रावली द्वारा की गई भोजली उपासना को सम्राट पृथ्वी राज चौहान आक्रमण कर बाधा पहुंचाई थी। उदल ने बहन स्वरूप चंद्रावली द्वारा भेजी गई राखी को स्वीकार कर पृथ्वी राज चौहान के आक्रमण को विफल कर भोजली विसर्जन को सफल किया था। उसी की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। 


 

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  • Web Title:Lodhi Kshatriya women will do Bhojali for brothers