DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

200 वर्ष से भी अधिक पुराना है कठौतिया शिव मंदिर

 महाशिवरात्रि 2018

कठौतिया शिव मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। इस मंदिर को लगभग दो सौ वर्ष पूर्व स्वर्गीय बखौरी साव ने बनवाया था। कठौतिया के समीप पहले झोपड़ी मे एक संत रहते थे। संत के मरने के बाद वहीं उनका समाधी बना दिया गया। संत की समाधि आज भी बरकरार है। बाद में उसके बगल में ही शिवालय बना दिया गया। साथ ही साथ मंदिर के नाम से एक एकड़ भूमि भी दान में दिया गया। इसके अलावा मंदिर के बगल में तालाब और कुआं भी बनवाया गया। उस संत ने कहा था कि मेरी मृत्यु होने पर मुझे जलाया नही जाय बल्कि इसी स्थल पर दफना दिया जाय।

कठौतिया शिव मंदिर शहर वासियों के लिए श्रद्धा का केंद्र है। शिवरात्री और सावन में श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भींड़ इसी मंदिर में लगती है। यहां लोग भगवान शिव की पूजा के साथ साथ समाधि की भी पूजा करते चले आ रहे हैं। शिव रात्रि के अवसर पर यहां महामेला और अखंड कीर्तन का आयोजन हर वर्ष होता है। इस मंदिर से लोगों का श्रद्धा जुड़ा हुआ है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Kathautia Shiva Temple mahashivratri 2018