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2 जून, 2020|2:13|IST

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करंगागुड़ी मंदिर में शिवलिंग दर्शन से होती है मनोकामना पूरी

करंगागुड़ी मंदिर

केरसई प्रखंड के प्रसिद्ध करंगागुड़ी शिव लिंग के दर्शन मात्र से सभी मनोकामना पूरी होती है। महाशिवरात्रि और सावन में भव्य श्रृंगार होता है और मेला का भी आयोजन किया जाता है। जिसमें हजारो की संख्या में चार राज्य के श्रद्धालु शिवलिंग का दर्शन करते है। इस जगह को मनोकमाना शिवलिंग के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगने पर मन की मुरादें स्वत: पूरी होती हैं। बताया जाता है कि प्राचीन काल के समय यहां लिंग नाव का रुप धारण कर डोंगाबांध में तैरते थे, इसलिए इसे डोंगा महादेव कहा जाता है। जानकारी के अनुसार करंगागुडी शिवलिंग की उत्‍पत्ति बादलों की गड़गड़ाहट और भूकम्‍प से हुई है। इसके प्रथम पुजारी शिलधर प्रधान को स्‍वपन  हुआ था कि वे अपने जीवन उपरांत सेवा करते रहे। मंदिर के बारे मन्याता है कि यहां स्थापित शिवलिंग हजारो वर्ष पुराना है और शिवलिंग में बना अरघा पाताल लोक तक जाता है। महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां चार राज्यों बिहार, झारखंड, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ से पहुंचती है भक्तों की टोली और भंडारा में करते हैं प्रसाद ग्रहण।

तीन दिनी महाशिवरात्रि सह धार्मिक मेला 12 से

करंगागुड़ी शिवधाम में महाशिवरात्रि सह धार्मिक मेला का आयोजन 12 फरवरी से किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत 12 फरवरी को अधिवास पूजन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद रात्रि में धार्मिक चलचित्र का भी आयोजन किया जाएगा। 13 को सुबह 5 बजे से महाशिवरात्रि पूजन, सात बजे से अखंड हरिकीर्तन, नौ बजे से प्रवचन, एक बजे से महाप्रसाद वितरण एवं 2:30 बजे धर्मसभा कार्यक्रम होगी।3:30 बजे से शिवबारात का भी आयोजन होगा। वहीं रात्रि में रुद्राभिषेक, प्रवचन एवं झारखंड के मशहूर कलाकारों द्वारा रंगारंग संस्‍कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा। 14 फरवरी को अखंड हरिकीर्तन नाम समाप्ति, दधिभंजन, पूर्णाहुति एवं भंडारा के साथ कार्यक्रम का समापन किया जाएगा। जानकारी देते हुए प्रबंधकारिणी समिति के सदस्‍यों ने सभी धर्मप्रेमियों से उपस्थिति का आग्रह किया है।

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  • Web Title:Karangundi Temple wishes in Maha Shivaratri 2018