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29 अक्तूबर, 2020|11:58|IST

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कराटे चैम्पियन खिलाड़ी की आर्थिक हालत खराब, हड़िया बेचने को मजबूर

देश में ना जानें ऐसी कितनी प्रतिभाएं हैं जो खेल के मैदान में तो जीत जाती हैं लेकिन सिस्टम उन्हें हरा देता है। ऐसा ही एक मामला झारखंड के रांची से आया है, जहां कराटे के राष्ट्रीय पदक विजेता 26 वर्षीय बिमला मुंडा हड़िया बेचकर अपना गुजर बसर कर रहीं हैं। मुंडा 2011 में 34 वें राष्ट्रीय खेलों में रजत पदक विजेता थी। 2012 में फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार द्वारा आयोजित कूडो इंटरनेशनल चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।

बिमला के परिवार में चार भाई-बहन सहित छः लोग हैं। पिता पेशे से एक किसान हैं। 45 वर्षीय बिमला के पिता का भी स्वास्थ ठीक नहीं रहता जिसके कारण वह मजदूरी के लिए नहीं जा पाते। इस साल फरवरी में उन्होंने अपने खर्चे के लिए कराटे की कोचिंग शुरु किया था। लेकिन लाॅकडाउन के कारण वह भी बंद हो गया जिसके बाद उन्हें मजबूरन हड़िया बेचना पड़ा।

बिमला मुंडा बचपन से ही अपने नाना-नानी के साथ रांची के कांकेर ब्लाक के पतरागोंडा गांव रहती आई हैं। वहीं उनके माता-पिता उसकी ब्लाक के सगरामपुर गांव में रहते हैं। बिमला बताती हैं, 'मैं बचपन से अपने दादा के साथ रह रहा हूं।  मेरे दादाजी 2000 से पहले रिटायर हुए थे। तब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। उन्हें हर महीने लगभग 6,000 रुपये पेंशन मिलती है, लेकिन उनकी पेंशन की अधिकांश राशि उनकी दवा में चली जाती है।' 

हड़िया बेचकर कमाती हैं रोजना 300 रुपये 

बिमला रोजाना 70 से 80 गिलास हड़िया बेचती हैं। एक गिलास की क़ीमत 4 रूपये हैं। अगर इस हिसाब से देखें तो उनकी रोजना की आमदनी 280 से 320 के बीच है। उनके अनुसार इस कमाई का ज्यादतर हिस्सा घर के सामान खरीदने में ही खर्च हो जाते हैं।

सरकारी नौकरी का है इंतजार 

बिमला ने दावा किया कि वह उन 33 खिलाडियों में से एक हैं जिनको डायरेक्ट जाॅब स्कीम के तहत सरकारी नौकरी मिलनी है। लेकिन उन्हें अबतक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है। बिमला के अनुसार,' मैंने 2019 में इस योजना के तहत आवेदन कर दिया था। फरवरी में कागजों का सत्यापन भी हो गया था और तब कहा गया था कि मार्च में नियुक्ति पत्र मिलेग। हम अब भी अपने नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहें हैं।' इस पूरे प्रकरण खेल सचिव पूजा सहगल ने कहा,' एक महीने के अन्दर उन्हें नियुक्ति पत्र दे दिया जाएगा।

नई खेल नीति से बदलेगी खिलाड़ियों किस्मत 

इस बीच, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बिमला की स्थिति का संज्ञान लिया।  सोरेन ने रविवार को एक ट्वीट में रांची के डिप्टी कमीशन से कहा कि वह खेल सचिव के समन्वय में खिलाड़ी को हर संभव सहायता प्रदान करें। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, 'जब हमारी आगामी खेल नीति लागू होगी, तो खिलाड़ियों का भविष्य बदल जाएगा।'

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