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झारखंड के मदरसों का सिलेबस बदलेगा, बीएड शिक्षकों की ही होगी नियुक्ति

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झारखंड के मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे दीन के साथ दुनियावी तालिम भी हासिल करेंगे। इसे लेकर राज्य के सभी मदरसों के पाठ्यक्रम में बदलाव होगा। मदरसा की शिक्षा को गुणवतापूर्ण बनाने के लिए इसके पुराने विषयों को आधुनिक रूप देने करने की तैयारी की जा रही है।

एनसीईआरटी ने अल्पसंख्यक शिक्षा के आधुनिकीकरण के लिए झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) के साथ अपना सुझाव साझा किया है। इस बदलाव के बाद गणित, अंग्रेजी और विज्ञान विषय अनिवार्य रूप से मदरसा में छात्र-छात्राओं को पढ़ना होगा। इसके साथ ही कंप्यूटर शिक्षा भी अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएगी। अभी मुख्य विषय वैकल्पिक विषय के रूप में रखा जाता रहा है।

जैक सचिव महीप कुमार सिंह बताते हैं कि नई शिक्षा नीति पर एनसीईआरटी ने मदरसा की शिक्षा प्रणाली पर शोध किया है।  इस पर हाल में ही दिल्ली में बैठक आयोजित की गई। इसमें हर राज्य से पहुंचे मदरसा व अन्य विशेषज्ञों ने बदलाव को जरूरी बताया।  उन्होंने बताया कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए यह पहल की जा रही है। मदरसा में पढ़ाई करने के बाद बच्चे इन विषयों की पढ़ाई कर विभिन्न क्षेत्रों में कैरियर बना सकेंगे। साथ ही तकनीकी शिक्षा में बच्चे आगे बढ़ सकेंगे और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकेंगे।

मदरसा में बीएड शिक्षकों को ही किया जाएगा नियुक्त
पाठ्यक्रम में बदलाव के साथ-साथ योग्य शिक्षकों को ही मदरसा में पढ़ाने का मौका मिलेगा। बीएड किए गए शिक्षकों की ही नियुक्ति की जाएगी। इन शिक्षकों में मुख्य रूप से गणित, अंग्रेजी और विज्ञान के योग्य शिक्षकों को रखा जाएगा। इसके साथ मदरसा में दीन की पढ़ाई पहले की तरह ही चलती रहेगी, इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने दिशा में 2011-12 को पहली बार पहल भी की थी, लेकिन यह लागू नहीं हो पाया।

सूबे में 776 मदरसा का संचालन होता है, करीब 40 हजार छात्र-छात्राएं हैं
सूबे में 776 मदरसों का संचालन होता है, इसमें 186 मदरसा अनुदान पर चलते हैं और 590 मदरसा बिना अनुदान के चल रहे हैं। सभी मदरसों की परीक्षा जैक द्वारा संचालित की जाती है। जैक ने बताया कि पाठ्यक्रम सभी मदरसों के लिए एक है और बदलाव होता है तो सभी के लिए मान्य होगा। मदरसा में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या करीब 40 हजार के आसपास है। 

 

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  • Web Title:Jharkhand : Syllabus of Madrasas will change and only B Ed teachers will be appointed