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आदिवासी सीटों पर सबकी नजर, 2024 के लिए व्यूह रचना में जुटी भाजपा-झामुमो; क्या है समीकरण ?

छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत खासकर छत्तीसगढ़ में आदिवासी सीटों पर बढ़त के बाद झारखंड में बीजेपी और झामुमो दोनों अपनी-अपनी व्यूह रचना में जुट गए हैं।

आदिवासी सीटों पर सबकी नजर, 2024 के लिए व्यूह रचना में जुटी भाजपा-झामुमो; क्या है समीकरण ?
Abhishek Mishraसत्यदेव यादव,रांचीTue, 05 Dec 2023 09:03 AM
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छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत खासकर छत्तीसगढ़ में आदिवासी सीटों पर बढ़त के बाद झारखंड में बीजेपी और झामुमो दोनों अपनी-अपनी व्यूह रचना में जुट गए हैं। इसके लिए पार्टियां रणनीति बनाने लगी हैं। वजह यह है कि जिस भी दल का खाते में आदिवासी सीटों का बड़ा हिस्सा गया वह सत्ता तक पहुंचने में कामयाब होगा।

राज्य 81 विधानसभा सीटों में से 28 एसटी आरक्षित

राज्य की 81 विधानसभा सीटों में से 28 एसटी (अनुसूचित जनजाति) आरक्षित हैं। 2019 विधानसभा चुनाव में भाजपा केवल दो एसटी सीटों (खूंटी व तोरपा) पर जीत दर्ज कर सकी।

भाजपा को सबसे अधिक नुकसान एसटी सीटों पर ही हुआ था। अब अगले साल होने वाले विस चुनाव में भाजपा एसटी सीटों पर अपनी जीत का ग्राफ ऊंचा करने के लिए ताकत लगाएगी। दूसरी ओर 26 एसटी सीटों पर जीत हासिल करने वाला सत्तासीन गठबंधन ‘इंडिया’ इस जीत को दोहराने के लिए अभेद व्यूह रचना करेगा।

संताल परगना में 7, कोल्हाल में 9, दक्षिणी छोटानागपुर में 11 व पलामू में एसटी की एक सीट है। भाजपा संताल व कोल्हान में ज्यादा जोर लगाती दिख रही है। 2019 में संताल के बोरियो में झामुमो 17 हजार से अधिक वोट से जीती। बरहेट में 25 हजार, लिट्टीपाड़ा में 13 हजार, महेशपुर में 34 हजार, शिकारीपाड़ा में 29 हजार, दुमका में 13 हजार, जामा में दो हजार से अधिक वोटों से झामुमो जीती। वोट का अंतर भाजपा के लिए चुनौती होगी। कोल्हाल की बात करें तो घाटशिला में झामुमो 6.5 हजार से अधिक वोट, पोटका में 43 हजार, सरायकेला में 15 हजार, चाईबासा में 26 हजार, मझगांव में 47 हजार, मनोहरपुर 16 हजार, चक्रधरपुर 12 हजार, खरसावां में 22 हजार से अधिक वोटों को झामुमो ने अपने पक्ष में किया। इस प्रमंडल में जगन्नाथपुर सीट पर 11 हजार से अधिक वोटों से कांग्रेस जीती।

एसटी सीट सत्ता का रास्ता

आंकड़ों पर गौर करें तो झारखंड की सत्ता का रास्ता एसटी सीटों से होकर जाता है। यही वजह है कि भाजपा, झामुमो के साथ अन्य राजनीतिक दल एसटी सीटों के लिए अगल रणनीति बनाते हैं। विस चुनाव 2019 में भाजपा को आदिवासी जमीन से संबंधित कानून में बदलाव व आजसू के साथ समझौता नहीं होने के कारण नुकसान हुआ।

सामान्य सीट -44   मतदाता- 13759798

एससी सीट -9       मतदाता- 2876614

एसटी सीट- 28      मतदाता- 6421623

कुल मतदाता- 23058035

एसटी सीटों पर भाजपा को हुआ अधिक नुकसान

2000 से 2019 के विधानसभा चुनावों पर गौर करें तो भाजपा की एसटी सीटों पर पकड़ कमजोर हुई है। 2000 में 12 एसटी सीटों पर जीतने वाली भाजपा 2019 में 2 सीट पर सिमट गई। 2014 में 11 सीट पर पार्टी जीती थी। वहीं, झामुमो ने एसटी सीटों पर पकड़ मजबूत करके सत्ता हासिल कर ली। वर्तमान में 19 एसटी सीटों पर झामुमो का कब्जा है। इंडिया गठबंधन के पास कांग्रेस की छह सीट और उपचुनाव की एक सीट को शामिल कर दें तो 26 सीटें हैं।

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