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शराब घोटाले में आरोपी योगेंद्र तिवारी को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने एक साथ खत्म किए 12 केस; इस आधार पर फैसला

ईडी द्वारा शराब घोटाले में जेल में बंद कारोबारी योगेंद्र तिवारी को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। लाइसेंसी शराब दुकानों में गड़बड़ी के खिलाफ दर्ज 12 केस खत्म कर दिए गए हैं।

शराब घोटाले में आरोपी योगेंद्र तिवारी को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने एक साथ खत्म किए 12 केस; इस आधार पर फैसला
Abhishek Mishraहिन्दुस्तान,रांचीWed, 22 Nov 2023 07:28 AM
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ईडी द्वारा शराब घोटाले में जेल में बंद कारोबारी योगेंद्र तिवारी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। लाइसेंसी शराब दुकानों में गड़बड़ी की शिकायत के बाद एक ही दिन योगेंद्र समेत अन्य के खिलाफ जो 12 मामले दर्ज हुए थे, वे सभी एक ही दिन खारिज कर दिए गए। यानी यह 12 केस अब खत्म हो गए।

जामताड़ा के खूंटीडीह, नारायणपुर, नाला, करमाटांड़, बिंदापत्थर, फतेहपुर, बाधदेहरी थाने में केस दर्ज हुआ था। चार्जशीट हुई थी, इसके बाद स्थानीय कोर्ट ने मामले में संज्ञान लिया था। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। पूरे मामले में राज्य सरकार ने संज्ञान लेने को गलत बताने के मामले में कोई गंभीर आपत्ति दर्ज नहीं करायी। ऐसे में सभी मामलों में हाईकोर्ट ने पूर्व में लिए गए संज्ञान को गलत व गैरकानूनी बताते हुए खारिज कर दिया। अब योगेंद्र तिवारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ यह केस खत्म हो गया।

ईडी ने मनी लाउंड्रिंग की जांच के दौरान इन 12 केस को भी अपना आधार बनाया था। साथ ही इन कांडों को भी अपनी ईसीआईआर का हिस्सा बनाया था।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पूरे मामले में आईपीसी के तहत कोई आरोप नहीं बनता। साथ ही जब्त शराब भी नकली या मिलावटी नहीं थी। ऐसे में यह 420 का मामला नहीं। साथ ही पुलिस कार्रवाई के लिए सक्षम प्राधिकार भी नहीं थी। ऐसे में मामले में संज्ञान को हाईकोर्ट ने गलत माना।

किस-किस ग्राउंड पर राहत

● राज्य सरकार के हलफनामे में बताया गया कि याचिकाकर्ताओं को देशी-विदेशी शराब बेचने का लाइसेंस 2021-22 के लिए दिया गया था। लाइसेंस की अवधि एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 की थी। वर्ष 2021- 22 के लिए रिन्यूअल होना था।

● बाद में सरकार ने बताया कि पुलिस को यह अधिकार नहीं था कि वह छापेमारी कर शराब जब्त कर सके। यह अधिकार उत्पाद विभाग व उसके सक्षम प्राधिकार के पास है।

● पुलिस ने चार्जशीट में बिहार एक्साइज एक्ट की धारा 47 ए लगायी थी। हाईकोर्ट को यह बताया गया कि शराब दुकानों में स्टॉक अधिक था, लेकिन यह बिहार एक्साइज एक्ट का मामला नहीं बनता।

क्या था पूरा मामला

जामताड़ा डीसी के मौखिक आदेश पर 15 जुलाई 2020 को कुंडाहित बीडीओ ने पुलिस टीम के साथ योगेंद्र तिवारी समेत अन्य की दुकानों पर छापेमारी की थी। पाया था कि शराब दुकानों के लाइसेंस 31 मार्च 2020 को ही एक्सपायर हो चुके हैं। सरकार की तरफ से 12 केस दर्ज कराए गए। याचिकाकर्ताओं ने पुलिस की चार्जशीट व कोर्ट संज्ञान को गलत बताया था। बाद में जब्त शराब याचिकाकर्ताओं को ही रिलीज कर दी गई थी। शराब में मिलावट नहीं मिली थी। केमिकल एग्जामिनेशन भी नहीं कराया गया।

योगेंद्र की हिरासत 11 दिन बढ़ी, अब पेशी दो को

शराब घोटाला मामले में जेल में बंद कारोबारी योगेंद्र तिवारी की हिरासत अवधि अदालत ने 11 दिनों तक बढ़ा दी है। ईडी के विशेष न्यायाधीश पीके शर्मा की अदालत में मंगलवार को उसे जेल से पेश किया गया।

अदालत ने अगली पेशी की तारीख दो दिसंबर निर्धारित की है। वह बीते 20 अक्तूबर से न्यायिक हिरासत में है। ईडी ने उक्त आरोप में उसे 19 अक्तूबर को गिरफ्तार किया था। 20 अक्तूबर को ईडी कोर्ट में उसे पेश किया गया।

ईडी ने गिरफ्तारी के बाद उससे 14 दिनों तक पूछताछ की थी। इसके बाद तीन नवंबर को जेल भेज दिया गया था। उस पर पावर ब्रोकर प्रेम प्रकाश के सहयोग से 19 जिलों में शराब के थोक व्यापार, फर्जी दस्तावेज के आधार पर शराब के टेंडर लेने और करोड़ों रुपए अर्जित करने का आरोप है। कोयला व बालू से की गई अवैध कमाई के पैसे को शराब के कारोबार में निवेश करने का भी आरोप है।

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