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हेमंत सोरेन की जमानत याचिका पर बहस पूरी, झारखंड HC ने सुरक्षित रखा फैसला

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में 31 जनवरी को ईडी ने गिरफ्तार किया था। उन पर रांची के बड़गाई क्षेत्र में 8.86 एकड़ के भूखंड पर कब्जा करने का आरोप है।

हेमंत सोरेन की जमानत याचिका पर बहस पूरी, झारखंड HC ने सुरक्षित रखा फैसला
Sourabh JainANI,रांचीThu, 13 Jun 2024 06:59 PM
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झारखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जमानत याचिका पर गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। बहस पूरी होने और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश रंगन मुखोपाध्याय की एकल खंडपीठ ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया।

ईडी की ओर से जमानत का विरोध किया गया। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि बड़गाई लैंड स्कैम में हेमंत सोरेन शामिल थे। इससे जुड़े तमाम साक्ष्यों का ईडी के अधिवक्ता ने जिक्र किया।

इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने 10 जून को न्यायाधीश रंगन मुखोपाध्याय की अदालत में हेमंत सोरेन को नियमित जमानत देने के लिए दलील पेश की थी। उन्होंने पक्ष रखते हुए कहा था कि बड़गाई की जिस 8.86 एकड़ जमीन मामले में हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया गया है, वह जमीन भुईंहरी है और उसका ट्रांसफर नहीं हो सकता है। यह सिविल मामला है इसलिए हेमंत सोरेन को जमानत दी जानी चाहिए।

जमानत याचिका पर बुधवार 12 जून को भी आंशिक सुनवाई हुई थी। तब एस.वी. राजू ने कहा था कि सोरेन ने 2009-10 में जमीन का अधिग्रहण किया था और इसके कब्जे को सुरक्षित करने के लिए एक चारदीवारी का निर्माण किया गया था। 

ईडी के वकील ने कहा कि संघीय एजेंसी ने भूमि का स्वतंत्र सर्वेक्षण भी किया था और पूछताछ करने पर उसकी देखभाल करने वाले ने बताया था कि उक्त भूमि हेमंत सोरेन की है। ईडी ने कहा कि इसके अलावा उसने कई दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिनसे पता चलता है कि सोरेन को लाभ पहुंचाने के लिए भूमि अभिलेखों में हेराफेरी की गई थी।

उधर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पूर्व मुख्यमंत्री को जमानत देने की वकालत करते हुए कहा था कि झामुमो नेता को ईडी ने एक आपराधिक मामले में झूठा फंसाया है। सिब्बल ने दलील दी कि सोरेन पर रांची में 8.86 एकड़ के भूखंड पर कब्जा करने का गलत आरोप लगाया गया है और यह कृत्य मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत अपराध नहीं बनता है, जिसके लिए सोरेन को हिरासत में लिया गया है।

ईडी ने आरोप लगाया है कि भूमि दस्तावेजों में फेरबदल किया गया और सोरेन ने मूल भूस्वामियों को जबरन बेदखल कर दिया। सिब्बल ने जवाब दिया कि मूल भूस्वामियों ने तब कोई शिकायत नहीं की, जब उनकी जमीन कथित तौर पर ली गई तो और न ही अधिकारियों से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि जबरन बेदखली की यह घटना 2009-10 में घटित हुई बतायी जाती है, लेकिन रिपोर्ट 2023 में ही तैयार की गई।

सिब्बल ने दलील दी कि यदि सोरेन के खिलाफ सभी आरोप सही भी हों, तो भी यह जबरन बेदखली का एक दीवानी मामला होगा, न कि आपराधिक मामला।

बता दें कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष सोरेन ने 27 मई को हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर कथित भूमि घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में जमानत मांगी थी। जिसके बाद अदालत ने ईडी से इस मामले में 12 जून को जवाब देने को कहा था। इसी मामले में गुरुवार को भी सुनवाई हुई। सोरेन को इस साल 31 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था।