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Hindi News झारखंडराज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने मॉब लिंचिंग से जुड़ा बिल राष्ट्रपति को भेजा, 'मॉब' की परिभाषा पर उलझन

राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने मॉब लिंचिंग से जुड़ा बिल राष्ट्रपति को भेजा, 'मॉब' की परिभाषा पर उलझन

इस बिल को दिसम्बर 2021 में झारखंड विधानसभा द्वारा पहली बार पारित किया गया था, इसके बाद जब उसे तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस के पास भेजा गया, तो उन्होंने इस पर दो आपत्तियां बताते हुए इसे लौटा दिया था।

राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने मॉब लिंचिंग से जुड़ा बिल राष्ट्रपति को भेजा, 'मॉब' की परिभाषा पर उलझन
Sourabh Jainहिन्दुस्तान टाइम्स,रांचीFri, 12 Apr 2024 12:03 AM
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झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने झारखंड विधेयक 2021 (हिंसा और मॉब लिंचिंग की रोकथाम) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास विचार के लिए भेजा है। इसमें हेमंत सोरेन सरकार द्वारा पारित कानून से जुड़े कुछ तकनीकी मुद्दे उठाए गए हैं। राजभव ने एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विधेयक को मंगलवार को राष्ट्रपति के पास भेजा गया है।

वरिष्ठ अधिकारी ने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर जानकारी देते हुए बताया कि 'यह विधेयक दो या अधिक हिंसक व्यक्तियों के समूह को भीड़ के रूप में परिभाषित करता है, जो कि भारतीय दंड संहिता में दी गई इसी शब्द की परिभाषा से अलग है, उसमें पांच या अधिक हिंसक व्यक्तियों के समूह को भीड़ के रूप में परिभाषित किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई भारतीय न्याय संहिता (BNS) भी पांच या अधिक लोगों के समूह को ही भीड़ के रूप में परिभाषित करती है। एक ही देश में एक ही शब्द के अलग-अलग अर्थ कैसे हो सकते हैं? इसमें कानूनी उलझने हैं, इसी वजह से विधेयक को राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजा गया है।'

पिछले राज्यपाल ने लौटा दिया था बिल

इस बिल को दिसम्बर 2021 में झारखंड विधानसभा द्वारा पारित किया गया था, इसके बाद जब उसे तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस के पास उनकी सहमति लेने के लिए भेजा गया, तो उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 200 में उल्लेखित अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए 18 मार्च, 2022 को उसे पुनर्विचार करने के लिए वापस कर दिया। साथ ही उन्होंने विधेयक की दो गलितियों की ओर भी ध्यान दिलवाया था। 

बैस की बताई दो में से एक गलती को सुधारा गया

राजभवन के अधिकारी के मुताबिक,'बैस की पहली आपत्ति हिंदी अनुवाद का मिलान नहीं होने पर थी, इसके अलावा उन्हें दूसरी आपत्ति भीड़ की परिभाषा को लेकर थी। 27 जुलाई 2023 को जब विधेयक दूसरी बार विधानसभा से पारित हुआ तो अनुवाद की गलती को ठीक कर लिया गया था, लेकिन भीड़ की परिभाषा में कोई बदलाव नहीं हुआ था।'

नए राज्यपाल ने राष्ट्रपति के पास भेज दिया

इसके बाद राज्य सरकार ने एकबार फिर विधेयक पर राज्यपाल की सहमति के लिए उसे दूसरी बार राजभवन भेज दिया। अधिकारी ने बताया कि,'लिहाजा जब यह नए राज्यपाल के सामने आया तो उन्होंने कानूनी राय लेने के बाद इसे राष्ट्रपति के समक्ष भेजना उचित समझा।'