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26 अक्तूबर, 2020|7:10|IST

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Jharkhand हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, जानें क्या है मामला

अनुसूचित जिले में सिर्फ इन्हीं जिलों में रहने वालों को ही  तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरी देने के प्रावधान को असंवैधानिक करार दिए जाने के झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने याचिका दायर करने की अनुमति प्रदान कर दी है। झारखंड हाईकोर्ट की तीन जजों की बेंच ने  21 सितंबर को सोनी कुमारी एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार की इस नीति को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था। साथ ही इस नीति के साथ अनुसूचित जिलों में नियुक्त सभी शिक्षकों की नियुक्ति को रद्द करते हुए सरकार को नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था। अदालत ने गैर अनुसूचित जिलों में हुई नियुक्ति में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। 

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने अनुसूचित जिलों में नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने का आदेश जारी कर दिया था। इस बीच अनुसूचित जिलों के शिक्षकों ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के अनुसूचित जिलों में नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और अन्य सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। 

सोनी कुमारी की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में एक नियोजन नीति बनायी है। इसमें अनुसूचित जिलों में तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरी इसी जिले के स्थायी निवासियों के लिए ही रखा है। गैर अनुसूचित जिले के लोग इन जिलों की नौकरियों में आवेदन देने योग्य नहीं है। सरकार ने दस साल के लिए यह प्रावधान किया है। सोनी कुमारी ने सरकार के इस निर्णय के असंवैधानिक करार देने का आग्रह किया था और कहा था कि सरकार के इस प्रावधान से एक जिले की शत-प्रतिशत नौकरी उसी जिले के लोगों के लिए आरक्षित हो जा रही है। यह भी संविधान के प्रावधान के विपरीत है। 


 

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  • Web Title:Jharkhand government will go to Supreme Court against High Court order know what is the matter