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22 नवंबर, 2020|1:00|IST

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नियोजन नीति के तहत शिक्षकों की रद्द हुई नियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई झारखंड सरकार

राज्य की नियोजन नीति और इस नीति के अनुसार 13 अनुसूचित जिलों में हुई शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने के आदेश के खिलाफ झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है। सरकार ने हाईकोर्ट के पूर्ण पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका(एसएलपी ) दायर की है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई की तिथि अभी निर्धारित नहीं की है। 

झारखंड हाईकोर्ट ने 21 सितंबर को राज्य की नियोजन नीति को असंवैधानिक करार दिया था और इस नीति के तहत शिक्षकों की नियुक्ति को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य सरकार ने 13 अनुसूचित जिलों की नियुक्तियां सिर्फ उसी जिले के स्थानीय निवासी के लिए सुरक्षित कर दिया है, जो गलत है। सरकार की नीति से अनुसूचित जिले के सभी पद उसी जिले के निवासियों के लिए शत-प्रतिशत आरक्षित हो गयी हैं, जबकि संविधान शत-प्रतिशत आरक्षण की इजाजत नहीं देता। इस कारण सरकार का यह नियम संवैधानिक नहीं है। हाईकोर्ट ने इस नीति के तहत 13 अनुसूचित जिलों में हुए शिक्षकों की नियुक्ति को रद्द कर दिया था और इन जिलों में नियुक्ति प्रक्रिया फिर से शुरू करने का निर्देश दिया था, जबकि 11 गैर अनुसूचित जिलों में नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने की छूट हाईकोर्ट ने प्रदान की थी। 

हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही लगा दी है रोक : हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिन शिक्षकों की नियुक्ति रद्द की गयी है वह पहले ही सुप्रीम कोर्ट गए हैं। शिक्षकों की एसएलपी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है और कहा है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति रद्द की गयी है उनकी सेवा जारी रहेगी, लेकिन इस मामले के अंतिम आदेश से उनकी नियुक्ति प्रभावित होगी। इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार समेत सभी पक्षों को नोटिस जारी किया था और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। इस मामले की सुनवाई इस माह के अंत में निर्धारित है। 

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  • Web Title:Jharkhand government goes to Supreme Court against canceled appointment of teachers under planning policy