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23 अक्तूबर, 2020|2:53|IST

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जामताड़ा : डॉक्टर की जगह कंपाउंडर ने किया डायलिसिस, मरीज की मौत

जामताड़ा सदर अस्पताल में मंगलवार को उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब डायलिसिस सेंटर में चिकित्सक के बदले कंपाउंडर सह टेक्निशियन द्वारा एक मरीज का डायलिसिस किये जाने का मामला सामने आया। डायलिसिस के दौरान अस्पताल के ही एसआरएल लैब में काम करने वाले कर्मचारी रतन साधु की मौत हो गई। 

घटना की सूचना मिलने के बाद सिविल सर्जन डॉ आशा इक्का ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल की। उन्होंने दोषी पर कार्रवाई करने की बात कही। टेक्निशियन राजू कुमार के अनुसार, देवघर से डॉ मनोज कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए डायलिसिस की देखरेख करते हैं। वहीं डॉ मनोज का कहना है कि डायलिसिस के पहले ही मरीज की मौत हो गई थी। हालांकि उन्होंने वीसी वीसी के जरिए डायलिसिस करने की बात स्वीकार की।

गौरतलब है कि सदर अस्पताल में डायलिसिस सेंटर का संचालन आउटसोर्सिंग कंपनी संजीवनी प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के साथ एमओयू के बाद इसी वर्ष 20 जनवरी से जामताड़ा सदर अस्पताल में डायलिसिस सेंटर शुरू किया गया है। मामले में सिविल सर्जन डॉ आशा एक्का ने कहा कि एजेंसी को पूर्व में ही शोकॉज किया गया है, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। मामले की जांच कर कार्रवाई होगी।

डॉक्टर की अनुपस्थिति में 516 बार हुआ मरीज का डायलिसिस : मंगलवार को जामताड़ा सदर अस्पताल में डायलिसिस के दौरान रतन साधु की मौत हो जाने की बात सामने आई। जिसके बाद परिजनों ने जमकर अस्पताल में हंगामा किया। मृतक रतन साधु अस्पताल के ही एसआरएल लैब में कार्यरत था। डायलिसिस सेंटर के कंपाउंडर सह टेक्निशियन राजू कुमार के अनुसार यह लैब 20 जनवरी से काम कर रहा है। तब से लेकर 30 जून तक कुल 579 बार इस सेंटर पर डायलिसिस किया गया है। अस्पताल के अटेंडेंस रजिस्टर के अनुसार, 24 मार्च से डॉ मनोज कुमार सेंटर पर नहीं आ रहे हैं। 24 मार्च से लेकर 30 जून तक 516 बार मरीजों का डायलिसिस किया गया है। 20 जनवरी से लेकर 24 मार्च तक केवल 63 बार ही डायलिसिस किया गया था। कर्मियों द्वारा यह दलील दी जा रही है कि देवघर में रह रहे चिकित्सक के द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से सलाह दी जाती है, उसके बाद डायलिसिस किया जाता है।

हार्ट अटैक से मरीज की मौत : राजू_ डायलिसिस करने वाले कंपाउंडर सह टेक्निशियन राजू कुमार ने बताया कि दोपहर में रतन साधु नामक मरीज डायलिसिस कराने के लिए आए थे। उन्हें डायलिसिस बेड पर सुलाने के बाद जैसे ही सुई लगाया, उन्हें हार्ट अटैक आ गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। जानकारी के अनुसार उक्त मरीज पहली बार सदर अस्पताल में डायलिसिस कराने के लिए आया था।

कई बार सिविल सर्जन ने किया है नोटिस: सिविल सर्जन डॉ आशा एक्का ने कहा कि हमें भी डायलिसिस के दौरान मरीज की मौत की जानकारी मिली है। घटना के बाद मैंने खुद जाकर निरीक्षण किया है। बिना चिकित्सक के क्यों डायलिसिस की जा रही थी, इसकी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी एजेंसी से चिकित्सक के बारे में शो कॉज किया गया था। पहले मार्च में और उसके बाद जून में भी एजेंसी को पत्र लिखकर पूछा गया था कि यहां कौन चिकित्सक कार्यरत हैं उसके बारे में बताएं। परंतु एजेंसी द्वारा अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया है।  
इसलिए आवश्यक कागजात लेकर कार्यालय में उपस्थित होने को कहा गया है ताकि मामले की जांच कर दोषी पर कार्रवाई हो तथा इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति ना हो। इस प्रकार की लापरवाही कभी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रयास है कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिले। 

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  • Web Title:Jamtara: Compounder did dialysis in place of doctor patient dies